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पीलीभीत: 50 करोड़ का शिक्षा-ट्रेजरी घोटाला, प्रभारी मंत्री बलदेव सिंह औलख का सख्त रुख— “अफसर हो या माफिया, सब जाएंगे जेल”

जन एक्सप्रेस/ पीलीभीत: जनपद के शिक्षा विभाग और ट्रेजरी (कोषागार) में हुए 50 करोड़ रुपये के महाघोटाले ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के प्रभारी मंत्री बलदेव सिंह औलख ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के साथ आपात बैठक की। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि इस भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी अफसर या माफिया को बख्शा नहीं जाएगा।

“मुख्यमंत्री तक पहुँचेगी जांच की आंच”

मीडिया से बातचीत में प्रभारी मंत्री औलख ने कहा कि सरकारी नियमों और ट्रेजरी की नीतियों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। उन्होंने कहा:

“यह प्रकरण बेहद गंभीर है। अब तक किसी ने मुझे इसकी जानकारी नहीं दी थी। इस पूरे मामले की रिपोर्ट माननीय मुख्यमंत्री जी तक पहुँचाई जाएगी। उच्च स्तरीय जांच के बाद दोषियों की अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई होगी।”

4 सदस्यीय समिति करेगी गहन पड़ताल

प्रभारी मंत्री ने घोटाले की तह तक जाने के लिए चार सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन कर दिया है। यह समिति शिक्षा विभाग के दस्तावेजों, बैंक खातों और ट्रेजरी के रिकॉर्ड्स की बारीकी से समीक्षा करेगी। मंत्री ने साफ किया कि अब किसी भी दोषी अधिकारी या कर्मचारी के पास बचने का कोई रास्ता नहीं है।

गिरफ्तारी की तलवार: संदिग्धों की सूची तैयार

पुलिस प्रशासन ने मंत्री के साथ बैठक के बाद संदिग्धों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिन प्रमुख नामों और खातों पर पुलिस की नजर है, उनमें शामिल हैं:

  • विमल कुमार वर्मा: निलंबित डीडीओएस (DDOS) कर्मचारी।

  • अजरा खान: मोहल्ला पंजाबीवाला और खुर्जा (बुलंदशहर)।

  • फहद खान: खुर्जा।

  • असमा अली: भोपाल।

  • शेख सलीमा चिश्ती: मणिपुर।

  • अशरारा प्रवीर: गाजियाबाद। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन संदिग्धों की गिरफ्तारी किसी भी समय संभव है।

प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल

हैरानी की बात यह है कि जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने 17 फरवरी को ही अपर मुख्य सचिव (वित्त) को पत्र लिखकर घोटाले की जानकारी दे दी थी, लेकिन शासन स्तर से कोई जवाब नहीं आया। मंत्री ने इस पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जानकारी छिपाने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी।

शिक्षकों के वेतन में हुई थी सेंधमारी

यह पूरा घोटाला शिक्षकों के वेतन और एरियर से जुड़ा बताया जा रहा है। प्रभारी मंत्री ने दोहराया कि “सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”

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