
जन एक्सप्रेस/नई टिहरी: उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर महासंघ का प्रांतीय आह्वान पर शुरू हुआ आंदोलन चौथे दिन भी जारी रहा। जनपद के डिप्लोमा इंजीनियर्स ने कार्य बहिष्कार कर अपनी एकजुटता दिखाई और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
निरीक्षण भवन में धरना, वार्ता विफल होने पर आक्रोश
महासंघ से जुड़े अभियंता लोक निर्माण विभाग (PWD) के निरीक्षण भवन परिसर में धरने पर बैठे रहे। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि महासंघ की मांगों को लेकर शासन स्तर पर कई बार वार्ता हुई, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया है। इसी उपेक्षा के कारण इंजीनियरों को मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ा।
प्रमुख मांगें जिन पर अड़े हैं अभियंता:
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वेतन विसंगति: कनिष्ठ अभियंताओं (JEs) की लंबे समय से लंबित वेतन विसंगतियों को तुरंत दूर किया जाए।
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पदोन्नति वेतनमान: 26 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी करने वाले डिप्लोमा इंजीनियर्स को पदोन्नति वेतनमान का लाभ मिले।
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ग्रेड पे: वर्ष 2014 के बाद नियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं को प्रथम एसीपी (ACP) के रूप में 5400 का ग्रेड पे प्रदान किया जाए।
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पुरानी पेंशन (OPS): एनपीएस को खत्म कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल किया जाए।
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स्थानांतरण एक्ट: ट्रांसफर एक्ट में ‘अति दुर्गम’ श्रेणी के लिए आवश्यक संशोधन किए जाएं।
आंदोलन की अगुवाई और उपस्थिति
सभा का कुशल संचालन नीतू चौहान ने किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार लिखित में उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक यह आंदोलन और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
इस दौरान इंजीनियर जयप्रकाश भट्ट, लघु सिंचाई मंडल अध्यक्ष अंकित सैनी, जनपद सचिव शक्ति आर्य, स्वाति चौहान, मोहम्मद इरफान, दुर्गेश कुमार, राजेंद्र सोढ़ी, ममता पवार, अनिल कुमार सहित बड़ी संख्या में अभियंता उपस्थित रहे।






