
जन एक्सप्रेस/हरिद्वार : धर्मनगरी हरिद्वार में दो बड़ी आध्यात्मिक विभूतियों का मिलन हुआ है। शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने शिष्टाचार भेंट की।
समाज निर्माण और युवा शक्ति पर हुई गंभीर चर्चा
इस खास मुलाकात के दौरान दोनों आध्यात्मिक विभूतियों के मध्य देश और समाज से जुड़े कई गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। बातचीत के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
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मूल्यपरक शिक्षा: आने वाली पीढ़ी को केवल साक्षर नहीं, बल्कि संस्कारी बनाने पर जोर दिया गया।
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युवाओं को सही दिशा: भटकाव की ओर बढ़ रहे युवाओं को सकारात्मक ऊर्जा और भारतीय संस्कृति से जोड़ने की आवश्यकता बताई गई।
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नैतिक मूल्यों का प्रसार: समाज में गिरते नैतिक स्तर को सुधारने के लिए मानवता के उत्थान और संगठित प्रयासों पर बल दिया गया।
दोनों संतों ने इस बात पर पूर्ण सहमति जताई कि समाज में शांति, सद्भाव और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए ऐसे समन्वित प्रयास होते रहने चाहिए।
प्रतीक चिह्न और शॉल भेंट कर किया गया सम्मान
यह भेंट न केवल आध्यात्मिक विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम बनी, बल्कि दोनों संस्थाओं के बीच मधुर संबंधों को भी दर्शाती नजर आई:
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डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी को गायत्री परिवार के मुख्यालय ‘शांतिकुंज’ का पवित्र प्रतीक चिह्न भेंट किया।
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जगद्गुरु शंकराचार्य ने भी स्नेह और सम्मान प्रकट करते हुए डॉ. चिन्मय पण्ड्या को शॉल ओढ़ाकर व आशीर्वाद देकर सम्मानित किया।






