
जन एक्सप्रेस/ हरिद्वार: देव संस्कृति विश्वविद्यालय (DSVV) में पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाओं को तलाशने के लिए “पर्यटन में उद्यमिता और स्टार्टअप: डिजिटल और सतत युग में अवसर” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना रहा।
डिजिटल नवाचार और सतत विकास पर जोर
कार्यशाला के मुख्य अतिथि जेएनयू (JNU) नई दिल्ली के सहायक प्रोफेसर डॉ. विक्रम बंसल ने पर्यटन स्टार्टअप्स के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग की बारीकियां सिखाईं। उन्होंने छात्रों को बताया कि कैसे एक मौलिक विचार (Idea) को व्यावहारिक उद्यम (Startup) में बदला जा सकता है।
कार्यशाला की मुख्य बातें:
-
सांस्कृतिक पर्यटन: डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पर्यटन केवल भ्रमण नहीं, बल्कि आत्मविकास का माध्यम है। उन्होंने छात्रों को नैतिक मूल्यों के साथ उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित किया।
-
नवाचार ही सफलता: विभागाध्यक्ष डॉ. उमाकांत इंदौलिया ने पर्यटन क्षेत्र में ‘जॉब क्रिएटर’ बनने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
-
संवादात्मक सत्र: बीबीए और एमबीए (पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन) के छात्रों ने विशेषज्ञों से बाजार के नए रुझानों और उद्योग की चुनौतियों पर सवाल-जवाब किए।
सहयोग और संचालन: कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. आशीष कुमार, डॉ. दिलीप साराह, डॉ. प्राची और श्री प्रखर सिंह पाल का विशेष सहयोग रहा।






