उठो लाल अब आँखें खोलो’ के रचयिता कवि सम्राट ‘हरिऔध’ की जयंती, निजामाबाद में भारत रक्षा दल ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

जन एक्सप्रेस/ आजमगढ़ : हिंदी साहित्य के अनमोल रत्न और खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य ‘प्रियप्रवास’ के रचयिता कवि सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ जी की जयंती बुधवार को निजामाबाद में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर भारत रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और उनकी कालजयी रचनाओं का पाठ किया।
साहित्य जगत के पथ प्रदर्शक हैं ‘हरिऔध’ जी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत रक्षा दल के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिकेश विक्रम ने कहा कि आजमगढ़ की धरती ने कई महान साहित्यकारों को जन्म दिया है, जिनमें ‘हरिऔध’ जी का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने कहा, “उनकी कविता ‘उठो लाल अब आँखें खोलो’ आज भी हर बच्चे की जुबां पर रहती है। हमें अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और महापुरुषों को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि वे समाज के पथ प्रदर्शक हैं।”
उपेक्षित प्रतिमा का कराया जीर्णोद्धार
हरिकेश विक्रम ने यह भी बताया कि वर्ष 2002 में स्थापित यह प्रतिमा लंबे समय से उपेक्षित और गंदगी के बीच थी। भारत रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने पहल करते हुए यहाँ गेट और चहारदीवारी की मरम्मत कराई और रंगाई-पुताई कर इसे गरिमामय रूप दिया। उन्होंने संकल्प लिया कि भविष्य में भी इस धरोहर की देखरेख जारी रहेगी।
कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति: इस अवसर पर धर्मवीर शर्मा, इन्दल चौहान, सभाजीत पाण्डेय, कामता सोनकर, धीर जी श्रीवास्तव, उमेश कुमार सहित कई स्थानीय लोग और कार्यकर्ता मौजूद रहे।






