
जन एक्सप्रेस / उत्तरकाशी: उत्तरकाशी जनपद में आज भगवान कंडार देवता का प्रकटोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। बाड़ाहाट के राजा और उत्तरकाशी के कोतवाल माने जाने वाले कंडार देवता के प्रति क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था है। उनके मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
वरुणावत पर्वत से जुड़ी है आस्था
कंडार देवता का प्रमुख मंदिर संग्राली गांव स्थित कंडार देवता मंदिर में वरुणावत पर्वत की चोटी पर स्थित है, जो उत्तरकाशी शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा उत्तरकाशी शहर में कलेक्ट्रेट परिसर के समीप भी उनका एक भव्य मंदिर स्थित है।
स्थानीय मान्यता है कि जहां कंडार देवता का आशीर्वाद होता है, वहां अन्याय अधिक समय तक टिक नहीं पाता।
मूर्ति की स्थापना से जुड़ी लोककथा
लोकश्रुतियों के अनुसार कंडार देवता की मूर्ति खेत की जुताई के दौरान प्राप्त हुई थी। उस समय के राजा ने मूर्ति को देवालय में नीचे स्थान दिया, लेकिन अगले दिन वह स्वयं सबसे ऊपर स्थापित मिली। ऐसा कई बार होने पर राजा ने इसे दिव्य संकेत माना और मूर्ति को सम्मानपूर्वक गांववासियों को सौंप दिया।
बाद में संग्राली क्षेत्र के देवदार वन में मंदिर का निर्माण कर उनकी स्थापना की गई। यह कथा इस संदेश का प्रतीक मानी जाती है कि सत्य और धर्म को कोई दबा नहीं सकता, वे स्वयं अपना स्थान बना लेते हैं।
ग्राम-ग्राम से जुड़ी है देव परंपरा
कंडार देवता केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं हैं। बसुंगा, ज्ञानसू, बाड़ाहाट, खांड, गंगोरी, पाटा, संग्राली और बगियाल सहित अनेक गांवों में उन्हें ग्राम देवता के रूप में पूजा जाता है।
स्थानीय परंपराओं के अनुसार विवाह, मुंडन, कुंडली मिलान और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ तिथि निर्धारण में भी कंडार देवता की मान्यता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
मेलों और लोक परंपराओं का केंद्र
क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों जैसे माघ मेला, भंडाणी मेला और हाथी रथ यात्रा में भी कंडार देवता की विशेष भूमिका मानी जाती है। इन आयोजनों को केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम माना जाता है।
श्रद्धा के साथ सामाजिक संदेश
ध्रुव नैथानी के अनुसार कंडार देवता उत्तरकाशी के आराध्य देव हैं और श्रद्धालु अपनी समस्याओं तथा मनोकामनाओं के साथ उनके दरबार में पहुंचते हैं।
कंडार देवता की परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जवाबदेही, समानता और न्याय का संदेश भी देती है। लोकमान्यताओं में उन्हें ऐसे देवता के रूप में देखा जाता है जो सत्य, कर्तव्य और सामाजिक संतुलन की प्रेरणा देते हैं।
आज के समय में भी कंडार देवता की कथा लोगों को यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, सत्य और संकल्प बनाए रखना चाहिए। न्याय में विलंब हो सकता है, लेकिन सत्य की विजय पर विश्वास बनाए रखना समाज की पुरानी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा रहा है।

