
जन एक्सप्रेस /हरिद्वार :- गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित नौ दिवसीय साधना शिविर श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हो गया। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे साधकों ने नौ दिनों तक गायत्री साधना, योग, प्राणायाम, ध्यान, सत्संग और आत्मचिंतन के विविध सत्रों में भाग लेकर संतुलित, सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
शांतिकुंज में प्रत्येक माह आयोजित होने वाले इस विशेष साधना शिविर का उद्देश्य भारतीय ऋषि परंपरा पर आधारित जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है। शिविर के दौरान प्रतिभागियों को विचार-शुद्धि, भाव-संवर्धन, आत्मअनुशासन और व्यक्तित्व परिष्कार के व्यावहारिक सूत्रों से अवगत कराया गया।
प्रातःकालीन साधना, यज्ञ, ध्यान और योगाभ्यास के साथ आयोजित प्रेरक व्याख्यानों में आत्मबल, संयम, सेवा और संस्कारयुक्त जीवन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि आध्यात्मिक साधना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचार, व्यवहार और चरित्र को बेहतर बनाने की सतत प्रक्रिया है।
समापन समारोह में शांतिकुंज के कार्यकर्ता ने कहा कि जब व्यक्ति अपने भीतर के विकारों को दूर कर सद्भाव, सेवा और संवेदना को जीवन में अपनाता है, तभी वास्तविक आध्यात्मिक उन्नति संभव होती है। उन्होंने प्रतिभागियों से शिविर में मिले संस्कारों और जीवन-मूल्यों को परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र में व्यवहारिक रूप से अपनाकर सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनने का आह्वान किया।
शिविर के समापन पर सभी साधकों ने नियमित गायत्री उपासना, स्वाध्याय, संयमित दिनचर्या अपनाने, नशामुक्त एवं संस्कारवान समाज के निर्माण तथा राष्ट्रहित में रचनात्मक योगदान देने का सामूहिक संकल्प लिया।






