
जन एक्सप्रेस /उत्तरकाशी :- उत्तराखंड में सड़क चौड़ीकरण और नई सड़क परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रस्तावित एवं जारी पेड़ों के कटान को लेकर पर्यावरण प्रेमियों ने चिंता व्यक्त की है। बड़कोट में शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस दौरान ‘ग्लेशियर लेडी’ शांति ठाकुर ने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण दिवस, हरेला जैसे अभियानों के माध्यम से वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान की योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंता का विषय है।
सड़क परियोजनाओं को लेकर जताई चिंता
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऋषिकेश-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग के फोरलेन निर्माण तथा देहरादून-झाझरा-मसूरी मार्ग जैसी परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षों के कटान की योजना पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर असर डाल सकती है।
उनका कहना है कि यदि विकास कार्यों में पर्यावरणीय पहलुओं की अनदेखी की गई तो भविष्य में जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और प्राकृतिक आपदाओं जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।
‘विकास के विरोधी नहीं, संतुलित विकास के पक्षधर’
पर्यावरण प्रेमियों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वैज्ञानिक और आवश्यकता आधारित विकास के समर्थक हैं। उनका कहना है कि सड़कों का सीमित एवं वैज्ञानिक चौड़ीकरण भी यातायात सुविधाओं में सुधार ला सकता है, जबकि इससे पर्यावरण को अपेक्षाकृत कम नुकसान होगा।
सरकार से संतुलित निर्णय लेने की अपील
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सरकार से विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए निर्णय लेने की मांग की। उनका कहना है कि उत्तराखंड की प्राकृतिक धरोहर, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को लागू किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर संदीप चौहान, अनुराधा चौहान, कल्पना ठाकुर और कमल सिंह चौहान सहित अन्य पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।






