
जन एक्सप्रेस /विकासनगर :-जौनसार-बावर क्षेत्र में जनजातीय अधिकारों और सरकारी योजनाओं के कथित दुरुपयोग को लेकर विवाद सामने आया है। गुरुवार को रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड-हिमाचल के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी के नेतृत्व में जिलाधिकारी देहरादून को ज्ञापन सौंपकर चकराता विधानसभा क्षेत्र में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चकराता विधानसभा क्षेत्र में कुछ बाहरी और गैर-जौनसारी व्यक्तियों को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ कथित रूप से नियमों के विपरीत दिया जा रहा है।
1983 के बाद दर्ज जमीनों की जांच की मांग
रूद्रसेना की ओर से कहा गया कि जौनसार-बावर को वर्ष 1967 से अनुसूचित जनजाति क्षेत्र का दर्जा प्राप्त है और जनजातीय भूमि एवं अधिकारों की सुरक्षा के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
ज्ञापन में दावा किया गया कि वर्ष 1983 के बाद गैर-जौनसारी नामों पर जमीन दर्ज होने के कुछ पुराने मामलों की जांच पहले भी हुई थी। संगठन का आरोप है कि ऐसी जमीनों के आधार पर अब प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, आयुष्मान, उद्यान विभाग समेत अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिए जाने के मामले सामने आ रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित मामलों में प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जांच पूरी होने तक लाभ रोकने की मांग
राकेश उत्तराखंडी ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि वर्ष 1983 के बाद गैर-जौनसारी नामों पर दर्ज जमीन और उनसे जुड़े सरकारी योजनाओं के लाभ की व्यापक जांच कराई जाए।
संगठन ने विवादित मामलों में जांच पूरी होने तक सरकारी योजनाओं का लाभ रोकने, अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित लाभार्थियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने तथा वास्तविक जौनसारी अनुसूचित जनजाति परिवारों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रशासन के रुख पर नजर
ज्ञापन सौंपने के दौरान श्याम जोशी, अतर सिंह चौहान, गीता राम जोशी, आशु बंसल और जवाहर दत्त जोशी समेत अन्य लोग मौजूद रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि जनजातीय भूमि और सरकारी योजनाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब इस मामले में प्रशासन की ओर से जांच को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर है। कथित भूमि रिकॉर्ड और सरकारी योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।






