
जन एक्सप्रेस /पुरोला :- उत्तरकाशी जनपद के रंवाई (रंवाल्टा) क्षेत्र और टिहरी गढ़वाल के जौनपुर क्षेत्र के समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने तथा क्षेत्र को पांचवीं अनुसूची के संवैधानिक संरक्षण में शामिल करने की मांग उठी है। जखोल निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता किशन सिंह रावत ने इस संबंध में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि इन क्षेत्रों के लोगों को भी जौनसार-बावर की तर्ज पर संवैधानिक अधिकार दिए जाएं।
पत्र में कहा गया है कि उत्तरकाशी का रंवाई (रंवाल्टा) क्षेत्र और टिहरी गढ़वाल का जौनपुर क्षेत्र भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से पड़ोसी जौनसार-बावर क्षेत्र के समान हैं। जौनसार-बावर को वर्ष 1967 में अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिल चुका है, लेकिन समान परिस्थितियों और सांस्कृतिक विरासत के बावजूद रंवाई और जौनपुर के निवासी अब तक इस सुविधा से वंचित हैं।
किशन सिंह रावत ने पत्र में उल्लेख किया है कि रंवाई और जौनपुर की लोक संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाज, बूढ़ी दिवाली, माघ मेला, महासू देवता और चालदा महाराज की परंपरा इस क्षेत्र की विशिष्ट जनजातीय पहचान को दर्शाती है। उनका कहना है कि यहां का समाज आज भी अपनी पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किए हुए है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि यह पूरा क्षेत्र हिमालय के दुर्गम इलाकों में स्थित है, जहां रोजगार के सीमित अवसर, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, शिक्षा तक सीमित पहुंच और कठिन आवागमन जैसी समस्याएं आज भी बनी हुई हैं। इन परिस्थितियों के कारण क्षेत्र के युवा और महिलाएं विकास की मुख्यधारा से पीछे हैं तथा आर्थिक रूप से समुदाय अत्यंत पिछड़े वर्ग में आता है।
अधिवक्ता किशन सिंह रावत ने पत्र में जल, जंगल और जमीन से जुड़े स्थानीय लोगों के पारंपरिक अधिकारों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1930 का तिलाड़ी कांड (रंवाई आंदोलन) इस क्षेत्र के लोगों के प्राकृतिक संसाधनों और अधिकारों की रक्षा के ऐतिहासिक संघर्ष का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि रंवाई (रंवाल्टा) और जौनपुरी समुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन कर उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान करने तथा क्षेत्र को पांचवीं अनुसूची के संवैधानिक संरक्षण में शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाए।
रिपोर्ट :- सचिन नौटियाल






