इंदिरा बैंक के खातेदार मिले मुख्यमंत्री से, आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

रायपुर । इंदिरा प्रियदर्शनी महिला नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड घोटाले की जांच पुनः प्रारंभ करवाने के लिए इंदिरा बैंक संघर्ष समिति के सदस्यों ने सोमवार को मुख्यमंत्री भूपेश से मिलकर धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जांच पुनः प्रारंभ होने से न्याय की उम्मीद जगी है, ऐसा महसूस होने लगा है कि अब इंदिरा बैंक घोटाले के सभी जिम्मेदारों को उसकी सजा मिलेगी और उनके संरक्षणकर्ता राजनीतिक लोग भी इस जांच के दायरे में आएंगे। जनप्रतिनिधि होने के बावजूद यदि बैंक घोटाले में उनकी संलिप्तता पाई जाती है तो सजा मिलनी चाहिए।
इंदिरा बैंक संघर्ष समिति के संयोजक कन्हैया अग्रवाल, शैलेश श्रीवास्तव, शंकर सोनकर, नूरजहां, पुरषोत्तम शर्मा, सुरेश बाफना ने उक्ताशय का बयान जारी करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री को सौंपे गये ज्ञापन में मांग की गई कि इंदिरा बैंक घोटाले की जांच के लिए पुलिस विभाग को समय अवधि निर्धारित की जाए ताकि निर्धारित समय में जांच पूरी हो सके। जांच के दायरे में जैसा कि न्यायालय ने आदेश किया है तत्कालीन मैनेजर उमेश सिन्हा के नारको टेस्ट में दिए गए बयानों के अनुरूप की जांच की जाए।
इंदिरा बैंक को डुबाने वाले सहकारिता के जिम्मेदारों के खिलाफ भी जांच की जाए। इंदिरा बैंक घोटाले का मुख्य कारण बने फर्जी कंपनियों के संचालकों और उनके संरक्षकों के खिलाफ की कार्रवाई की जाए। घोटाले बाजों को ऋण स्वीकृति किस आधार पर मिली, फर्जी एफडीआर कैसे जारी हुए, इन सब की भी जांच हो और जिम्मेदारों को इसकी सजा मिले। खातेदारों की जमा पूंजी आपके आदेश से घोटाले बाजों से वसूली करके वापस दिलाई जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि हम सबको विश्वास है जैसा कि आपने चिटफंड कंपनियों के मामले में जांच और कार्रवाई की है, भुगतान प्रारंभ कराया है निश्चित रूप से इंदिरा बैंक घोटाले के मामले में भी आप के आदेश पर कार्रवाई अवश्य होगी। मुख्यमंत्री भूपेश को इंदिरा बैंक के संबंधित जानकारियां-दस्तावेज देते हुए खाता धारको ने बैंक घोटाले के अभियुक्तों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।






