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हमीरपुर में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल से प्रशासन की तत्परता का हुआ परीक्षण

एमरजेंसी हालात से निपटने की तैयारियों की जमीनी हकीकत परखी गई

जन एक्सप्रेस/हमीरपुर: किसी भी आपात स्थिति में जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रशासनिक तैयारियों की वास्तविक स्थिति को परखने के उद्देश्य से हमीरपुर जनपद में एक व्यापक मॉक ड्रिल अभ्यास आयोजित किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि आपदा या आकस्मिक संकट की स्थिति में प्रशासन, पुलिस, फायर सर्विस और अन्य विभाग कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

उत्तर प्रदेश दिवस एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर आयोजित इस विशेष मॉक ड्रिल का आयोजन राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम हमीरपुर में किया गया। कार्यक्रम की निगरानी स्वयं जिलाधिकारी घनश्याम मीणा एवं पुलिस अधीक्षक डॉ. दीक्षा शर्मा द्वारा की गई।

सायरन बजते ही अंधेरे में डूबा स्टेडियम

जैसे ही आपातकालीन सायरन बजा, पूरे स्टेडियम परिसर में अचानक ब्लैकआउट कर दिया गया। करीब दो मिनट तक पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूबा रहा। इस दौरान यह देखा गया कि अचानक उत्पन्न स्थिति में सुरक्षा बल, प्रशासनिक अमला और राहत दल कितनी तेजी से सक्रिय होते हैं।

ब्लैकआउट के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, घबराहट से बचाने और अनुशासन बनाए रखने की व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया गया। यह अभ्यास पूरी तरह वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप रखा गया था, जिससे किसी भी संभावित खतरे से निपटने की वास्तविक क्षमता सामने आ सके।

आग लगने की ख्याली स्थिति बनाकर किया गया अभ्यास

मॉक ड्रिल के दौरान आग लगने की काल्पनिक स्थिति उत्पन्न की गई। सूचना मिलते ही फायर सर्विस के जवान बिना समय गंवाए घटनास्थल पर पहुंचे और आधुनिक उपकरणों की मदद से आग पर काबू पाने की प्रक्रिया शुरू की।

दमकल कर्मियों ने हाईटेक फायर फाइटिंग तकनीकों का प्रयोग करते हुए यह दिखाया कि किस प्रकार कम समय में आग को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही, आग में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास भी किया गया।

घायलों का रेस्क्यू और प्राथमिक उपचार

ड्रिल के दौरान घायल हुए लोगों की भूमिका निभा रहे स्वयंसेवकों को रेस्क्यू टीम द्वारा सुरक्षित बाहर निकाला गया। मौके पर मौजूद मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार, स्ट्रेचर ऑपरेशन और त्वरित चिकित्सा सहायता की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया।

इस अभ्यास का उद्देश्य यह जांचना था कि संकट की घड़ी में घायल व्यक्तियों को किस तरह शीघ्र इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है और अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

विभागों के बीच तालमेल की हुई परीक्षा

मॉक ड्रिल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय और संचार व्यवस्था को परखना भी था। पुलिस, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और स्वयंसेवी दलों के बीच सूचना आदान-प्रदान, निर्णय लेने की गति और जिम्मेदारियों के निर्वहन का परीक्षण किया गया।

ड्रिल के दौरान यह देखा गया कि संकट के समय किस अधिकारी को क्या जिम्मेदारी निभानी है और किस स्तर पर तुरंत निर्णय लिया जाना चाहिए।

डीएम और एसपी ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा

पूरे अभ्यास के दौरान जिलाधिकारी घनश्याम मीणा एवं पुलिस अधीक्षक डॉ. दीक्षा शर्मा स्वयं मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने हर गतिविधि का बारीकी से निरीक्षण किया और अलग-अलग बिंदुओं पर संबंधित अधिकारियों से जानकारी भी प्राप्त की।

अभ्यास के समापन के बाद अधिकारियों ने फायर सर्विस एवं अन्य विभागों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के अभ्यास आपदा प्रबंधन की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक हैं।

 डीएम का स्पष्ट निर्देश

जिलाधिकारी घनश्याम मीणा ने कहा कि—

“इस तरह की मॉक ड्रिल से यह स्पष्ट होता है कि हम किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कितने तैयार हैं। भविष्य में भी ऐसे ट्रायल नियमित रूप से कराए जाएं, ताकि वास्तविक संकट के समय जान और माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।”

उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधन योजनाओं को समय-समय पर अपडेट किया जाए और जमीनी स्तर पर कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता रहे।

 पुलिस कप्तान ने जताया संतोष

पुलिस अधीक्षक डॉ. दीक्षा शर्मा ने भी मॉक ड्रिल को सफल बताते हुए कहा कि—

“आपात हालात में त्वरित निर्णय, बेहतर तालमेल और अनुशासन सबसे अहम होता है। इस मॉक ड्रिल से मिला आत्मविश्वास

इस पूरे अभ्यास ने यह संदेश दिया कि जिला प्रशासन किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए लगातार सजग और तैयार है। मॉक ड्रिल के माध्यम से न केवल व्यवस्थाओं की कमियां सामने आती हैं, बल्कि सुधार की दिशा भी तय होती है।

जनपद स्तर पर इस प्रकार की तैयारियां आमजन में सुरक्षा का भरोसा भी पैदा करती हैं।

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