भागवत कथा दिलों को जोड़ने का माध्यम, दुख इंसान को भगवान के करीब लाता है : दुर्गेश आचार्य

जन एक्सप्रेस/उत्तरकाशी: नंदगांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन संत दुर्गेश आचार्य ने श्रद्धालुओं को भक्ति, प्रेम और जीवन के गहरे संदेश दिए। उन्होंने कहा कि भागवत कथा आज के समय में समाज को जोड़ने और लोगों के बीच प्रेम व सद्भाव बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम है।
दुर्गेश आचार्य ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कौरवों पर पांडवों की विजय कराकर यह संदेश दिया कि अंततः जीत हमेशा सत्य, न्याय और अच्छे कर्मों की होती है। उन्होंने कहा कि यह प्रकृति का भी नियम है, जैसे घना अंधेरा सूरज निकलते ही समाप्त हो जाता है।
कथा के दौरान उन्होंने माता कुंती का प्रसंग सुनाया। आचार्य ने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुंती से वरदान मांगने को कहा तो उन्होंने दुख मांगा, क्योंकि दुख में मनुष्य भगवान को सच्चे मन से याद करता है, जबकि सुख में अक्सर इंसान ईश्वर को भूल जाता है।
उन्होंने इस बात को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार शरीर का दर्द बीमारी का संकेत देता है और हमें उपचार के लिए प्रेरित करता है, उसी तरह जीवन के दुख इंसान को भीतर से जागृत कर आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जाते हैं।
दुर्गेश आचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में भागवत कथा भगवान का साक्षात स्वरूप है। जो व्यक्ति श्रद्धा और मन से कथा सुनता और उसे जीवन में अपनाता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। इससे मन को शांति और जीवन को नई दिशा मिलती है।
कथा सुनने पहुंचे श्रद्धालुओं ने कहा कि आचार्य की सरल और सहज शैली ने उनके मन को गहराई से प्रभावित किया। लोगों ने कहा कि भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने का विज्ञान है, जो प्रेम, धैर्य और एकता का संदेश देता है।






