उत्तरकाशीउत्तराखंड

धराली की वापसी आपदा के मलबे से उम्मीद तक हर मंगलवार गूंजते हैं भजन

जन एक्सप्रेस / उत्तरकाशी :   5 अगस्त 2025 की भीषण आपदा ने उत्तरकाशी के धराली गांव से बहुत कुछ छीन लिया था। गांव की मातृशक्ति का वह स्थान भी मलबे में दब गया, जहां हर मंगलवार भजन-कीर्तन की परंपरा चलती थी। लेकिन अब समय ने करवट ली है और वही मंगलवार फिर लौट आया है।

हिमालयन पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान (जाड़ी) द्वारा ग्राम प्रधान के अनुरोध पर एक नया सामुदायिक भवन बनाया गया, जिसका लोकार्पण 19 अप्रैल 2026 को पुष्कर सिंह धामी ने किया। आज यह भवन सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि पूरे धराली गांव की नई उम्मीद बन चुका है।


क्या बदला इस भवन से?

1. मन का मरहम

हर मंगलवार गांव की महिलाएं इस भवन में एकत्र होकर भजन-कीर्तन करती हैं। यहां बिछुड़े अपनों के लिए प्रार्थना होती है और गांव की खुशहाली की कामना। आपदा का दर्द अब धीरे-धीरे भक्ति में घुलता नजर आता है।

2. सेवा का केंद्र

यह भवन अब यात्रियों के लिए लंगर और रात्रि विश्राम का केंद्र बन चुका है। यहां राहगीरों को भोजन और ठहरने की सुविधा मिलती है, जिससे यह स्थान सेवा और सहारे का प्रतीक बन गया है।

3. रोजगार की नई डोर

भवन के साथ ही एक एप्पल स्टोर और ग्रेडिंग सेंटर भी स्थापित किया गया है। सेब की पैकिंग से लेकर PDS राशन वितरण तक, सब कुछ यहीं से संचालित होता है। यह केंद्र राहत सामग्री का भंडार भी बना हुआ है।


सामूहिक प्रयास से बदली तस्वीर

इस पुनर्निर्माण में धराली युवा सहकारिता, जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, महेश पंवार, माधवेंद्र रावत और ग्राम प्रधान अजय नेगी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। जाड़ी संस्थान के सचिव द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने आपदा के तुरंत बाद “धराली आजीविका पुनर्स्थापना मिशन” शुरू किया।

इस मिशन के तहत गांव में उपकरण, स्प्रे मशीन, स्कूल फीस सहायता, एप्पल स्टोर और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई गईं।

ग्राम प्रधान अजय नेगी ने कहा,
“जब सब कुछ बिखर गया था, तब जाड़ी संस्था ने हमें संभाला। भवन के साथ हमारा हौसला भी लौट आया।”

वहीं युवा सहकारिता के जयदेव पंवार ने कहा,
“निराशा के अंधेरे में जाड़ी संस्था ने उम्मीद का दीप जलाया। युवाओं को जोड़ा और विकास की राह फिर शुरू की।”


उम्मीद की नई कहानी

धराली की यह कहानी सिर्फ एक भवन के निर्माण की नहीं, बल्कि टूटे हुए मनोबल को जोड़ने की है। यह उदाहरण है कि जब समाज, संस्था और नेतृत्व एक साथ आते हैं, तो राख से भी रोशनी पैदा हो सकती है।

आज धराली के हर मंगलवार में वही रोशनी, वही उम्मीद और वही जीवन की नई शुरुआत दिखाई देती है।

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