उत्तर प्रदेशचित्रकूट

आरोग्यधाम में मानवाधिकार पर संवाद कार्यक्रम आयोजित

सामाजिक समानता, सुरक्षा, शिक्षा, स्वतंत्रता और न्याय जैसे मूल अधिकारों पर वक्ताओं ने बेबाकी से रखे अपने विचार

जन एक्सप्रेस/चित्रकूट/ दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा आरोग्यधाम के सेमिनार हाॅल में रविवार को मानवाधिकार पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियांक कानूनगो मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संवाद कार्यक्रम का शुभारंभ प्रियंक कानूनगो, दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव निखिल मुंडले, संगठन सचिव अभय महाजन, सचिव अपराजित शुक्ल, सीईओ अमिताभ वशिष्ठ द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की प्रतिमा के समक्ष पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलित कर हुआ।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने अपने मुख्य आतिथ्य उद्बोधन में कहा कि मानवाधिकारों के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन के लिए लोगों, समाजों और देशों के बीच विचारों, चिंताओं और अनुभवों का आदान-प्रदान करना, जो जीवन, स्वतंत्रता, शिक्षा और समानता जैसे बुनियादी अधिकारों से जुड़े हैं, ताकि एक न्यायपूर्ण समाज की नींव रखी जा सके और हर व्यक्ति के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके, जैसा कि 1948 की मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा में बताया गया है। जागरूकता और शिक्षा मानवाधिकारों के सम्मान के लिए महत्वपूर्ण हैं, और सोशल मीडिया जैसे माध्यम इसे फैलाने में मदद करते हैं। उन्होंने सामाजिक समानता, सुरक्षा, शिक्षा, स्वतंत्रता और न्याय जैसे मूल अधिकारों पर अपने विचार बेबाकी से रखे। कानूनगो ने कहा कि हम बात करेंगे एक ऐसे संस्थान की, जिसने ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ का सपना साकार किया है। ​दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना 1968 में राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख ने की थी। उनका एक ही सपना था, गाँवों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना। यह संस्थान दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानवदर्शन’ पर आधारित है। ​आरोग्यधाम में आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा से लोगों का इलाज होता है और औषधीय पौधों पर शोध भी होता है। ​उद्यमिता विद्यापीठ युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करता है, जिससे वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें। कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को जैविक और आधुनिक खेती सिखाता है, ताकि उनकी आय बढ़ सके। गुरुकुल बच्चों को संस्कार और आधुनिक ज्ञान दोनों देता है। ​दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो दिखाता है कि कैसे ग्रामीण विकास के माध्यम से पूरे देश को बदला जा सकता है। यह आज भी लाखों लोगों को प्रेरित कर रहा है।दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव निखिल मुंडले ने मानवाधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की बात को स्पष्टतापूर्वक रखा। समाज के सभी स्तरों पर महिला अधिकारों को मजबूत करने की एक गंभीर पहल है। उन्होंने जोर दिया कि संवाद और जागरूकता कोई एक दिन का विषय नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि मानवाधिकारों के बिना स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र की कल्पना असंभव है। सीईओ अमिताभ वशिष्ठ ने बताया कि ऐसे संवाद कार्यक्रम सकारात्मक बदलाव की नींव रखते हैं। कार्यक्रम का संचालन आयुर्वेद शोध सदन के प्रभारी डाॅ मनोज त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस मौके पर दीनदयाल शोध संस्थान के महाप्रबंधक डाॅ अनिल जायसवाल सहित चित्रकूट प्रकल्प के सभी प्रभारी एवं प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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