चित्रकूट में ARTO की ‘राजधानी एक्सप्रेस’ पर ब्रेक कब लगाएंगे योगी?
रामराज्य में लूट की पराकाष्ठा!

जन एक्सप्रेस चित्रकूट /रामराज्य” की कल्पना को ज़मीन पर उतारने का दावा करने वाली योगी सरकार के लिए चित्रकूट की सड़कों से उठ रही सच्चाई एक करारा तमाचा साबित हो रही है। यहाँ परिवहन विभाग खासकर ARTO कार्यालय, भ्रष्टाचार का ऐसा गढ़ बन गया है, जहाँ न नियम की कीमत है, न जान की। कानून की चादर ओढ़कर धड़ल्ले से लूट का तंत्र चलाया जा रहा है, और जनता पूछ रही है — आख़िर कब गिरेगा योगी जी का बुलडोज़र इस गोरखधंधे पर?
बिना परमिट दौड़तीं डग्गामार बसें: किसकी छतरी के नीचे फल-फूल रही मनमानी?
डभौरा से मानिकपुर तक दौड़ रहीं मध्यप्रदेश नंबर की कई बसें वर्षों से बिना किसी वैध परमिट के यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं। आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन ARTO और प्रशासन की नींद अब तक नहीं टूटी। क्या ये सब ऊपरी संरक्षण के बिना संभव है?
बिना नंबर प्लेट के ओवरलोड ट्रक – सड़कों पर मौत की रफ्तार
चित्रकूट में धड़ल्ले से दौड़ रहे बिना नंबर के ओवरलोड डंपर खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं। हाल ही में राजापुर में एक दंपति की जान इसी लापरवाही की भेंट चढ़ गई, लेकिन आज भी वही ट्रक, वही रफ्तार, और वही प्रशासनिक खामोशी बनी हुई है।
ARTO ऑफिस या दलाली का अड्डा?
ARTO कार्यालय के बाहर दलालों की भीड़ अब कोई नई बात नहीं। पहचान के बावजूद कार्रवाई ना होना इस बात का इशारा है कि खेल कहीं बहुत ऊपर तक जुड़ा हुआ है। क्या दलालों की जड़ें सीधे ARTO विवेक शुक्ला के दफ्तर के भीतर तक हैं?
“मंथली” का खेल – हर गैरकानूनी गाड़ी के पीछे है एक तयशुदा रेट!
सूत्रों की मानें तो बिना परमिट बसें और बिना नंबर प्लेट वाले ट्रक एक निर्धारित “मंथली” के दम पर आराम से दौड़ते हैं। ये पैसा कहाँ जा रहा है? कौन है इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड? जवाब देना होगा।
ARTO की ऑडियो पॉलिटिक्स – सच्चाई की झलक या ब्लैकमेलिंग की नई स्क्रिप्ट?
जैसे ही मीडिया ने सवाल उठाए, ARTO साहब की जेब से एक “ऑडियो क्लिप” सामने आ गई। लेकिन सवाल ये है—अगर ये क्लिप पहले से थी, तो अब क्यों जारी की गई? क्या ये असली सच्चाई है या एक बचाव की रणनीति?
कानून से ऊपर ARTO विवेक शुक्ला?
जिस बेहयाई से ट्रैफिक नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, वह सिर्फ लापरवाही नहीं—बल्कि गहरी मिलीभगत की बू देती है। वर्षों से ARTO प्रशासनिक पद खाली है, और इसी खाली कुर्सी का फायदा उठाकर विवेक शुक्ला ने कार्यालय को ‘कमाई का हब’ बना डाला है।
पूर्व सांसद भी चिंतित – बोले, “गति पर लगाम ज़रूरी”
पूर्व सांसद भैरव प्रसाद मिश्र ने कहा कि उन्होंने कई बार बिना नंबर प्लेट की तेज रफ्तार गाड़ियों को लेकर प्रशासन को चेताया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सड़कों पर कैमरे लगाने और स्पीड मॉनिटरिंग पर बल देने की मांग की।
जनता का सीधा सवाल – “योगी जी, अब तो कुछ करिए!”
रामराज्य की नींव अगर ऐसी बेलगाम लूट और भ्रष्टाचार पर रखी जा रही है, तो बदलाव की उम्मीद कहाँ से करें? चित्रकूट की जनता अब सीधा सवाल कर रही है — योगी सरकार इस भ्रष्ट व्यवस्था पर आखिर कब कार्रवाई करेगी?






