EDUCATIONLucknowNOIDAPoliticsUP Breaking Newsअन्य खबरेटॉप न्यूज़ट्रेंडिंगदिल्लीदेशब्रेकिंग न्यूज़

GenZ को साधने में जुटी BJP? PM मोदी का कॉन्सर्ट जैसा कार्यक्रम और बदली सियासी रणनीति

जन एक्सप्रेस /वडोदरा :-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को गुजरात के वडोदरा में युवाओं के बीच एक अलग अंदाज में संवाद किया। महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के पवेलियन ग्राउंड में आयोजित ‘NaMo for Viksit Bharat’ कार्यक्रम का फॉर्मेट पारंपरिक राजनीतिक रैली से काफी अलग नजर आया। कार्यक्रम में Y-शेप रैंप, आधुनिक प्रोडक्शन तकनीक और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जैसे प्रयोग किए गए।र्यक्रम के लिए पहली बार प्रधानमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रम में BookMyShow के जरिए मुफ्त रजिस्ट्रेशन कराया गया। उपलब्ध सीटें करीब एक घंटे में भर गईं और बड़ी संख्या में लोग वेटिंग लिस्ट में पहुंच गए। BookMyShow की आधिकारिक इवेंट लिस्टिंग के मुताबिक कार्यक्रम 8 सितंबर को महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी पवेलियन ग्राउंड में आयोजित किया गया और इसमें 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए प्रवेश रखा गया था।

रैली नहीं, युवाओं के लिए तैयार किया गया नया फॉर्मेट

वडोदरा के कार्यक्रम की सबसे खास बात इसका मंच था। प्रधानमंत्री के लिए मुख्य मंच से आगे बढ़ता हुआ Y-शेप रैंप तैयार किया गया था। इसका मकसद प्रधानमंत्री को दर्शकों और युवाओं के ज्यादा करीब लाना था।कार्यक्रम में 4K और ब्रॉडकास्ट स्तर की तकनीक का इस्तेमाल किया गया। आयोजन की तैयारी में जिस तरह की प्रोडक्शन वैल्यू दिखाई गई, उसकी तुलना क्रिकेट और बड़े खेल आयोजनों के प्रसारण से भी की गई।कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने युवाओं के बीच पहुंचकर संवाद किया। रिपोर्टों के मुताबिक माहौल को युवा-केंद्रित बनाने के लिए लोकप्रिय संगीत का भी इस्तेमाल किया गया।वहीं, कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने विकास परियोजनाओं पर भी बात की। वडोदरा दौरे में ₹35,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास किया गया।

आखिर BJP का GenZ पर इतना फोकस क्यों?

यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि पिछले कुछ समय में युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहे हैं। NEET-UG और परीक्षा सुधारों को लेकर छात्रों के विरोध के बाद केंद्र सरकार ने युवाओं से सीधे संवाद बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।इसी कड़ी में ‘One Day, One University’ जैसे कार्यक्रम की योजना सामने आई। इसके तहत केंद्रीय मंत्रियों को अलग-अलग विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों से बातचीत करने, उनकी समस्याएं सुनने और सरकार की योजनाओं की जानकारी देने की पहल की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक यह पहल छात्र आंदोलनों और युवाओं की चिंताओं के बीच शुरू की गई।BJP ने भी GenZ के लिए अलग आउटरीच रणनीति तैयार की है। पार्टी ने युवा मतदाताओं से जुड़ने के लिए एक विशेष टीम बनाई है, जिसमें नितिन नबीन, स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े जैसे नेता शामिल हैं।

PM मोदी का युवाओं की भाषा में संवाद

युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश सिर्फ कार्यक्रमों के फॉर्मेट तक सीमित नहीं है। प्रधानमंत्री के हालिया छात्र कार्यक्रमों में युवाओं के बीच इस्तेमाल होने वाले शब्दों और संदर्भों का इस्तेमाल भी देखने को मिला है।इसका मकसद युवाओं से संवाद को ज्यादा सहज और उनकी भाषा के करीब बनाना माना जा रहा है। वडोदरा कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री का मंच और पूरा आयोजन पारंपरिक राजनीतिक सभा से अलग नजर आया।हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ भाषा और कार्यक्रम का फॉर्मेट बदलने से युवाओं का भरोसा हासिल किया जा सकता है?

GenZ के सामने असली मुद्दे क्या हैं?

भारत की युवा आबादी के लिए रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, पेपर लीक, स्किल डेवलपमेंट और भविष्य के अवसर जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।सोशल मीडिया के दौर में GenZ किसी भी राजनीतिक संदेश को सिर्फ मंच से सुनकर स्वीकार नहीं करती। युवा सवाल भी पूछते हैं, तुलना भी करते हैं और अलग-अलग स्रोतों से जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।यही वजह है कि राजनीतिक दलों के लिए युवाओं तक पहुंच बनाना अब सिर्फ रैली या भाषण तक सीमित नहीं रह गया है। सोशल मीडिया, कैंपस संवाद, डिजिटल कंटेंट और सीधे संवाद की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

क्या ‘GenZ Outreach’ BJP के लिए गेमचेंजर साबित होगा?

BJP की मौजूदा रणनीति को देखें तो पार्टी एक साथ कई स्तरों पर युवाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रमों का फॉर्मेट बदला जा रहा है, तो दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्रियों को विश्वविद्यालयों में भेजने की योजना बनाई गई है।पार्टी संगठन में भी युवाओं को अधिक भूमिका देने की कोशिश हो रही है। इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए भी युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर जोर है।लेकिन इसका वास्तविक असर तभी पता चलेगा जब युवा इन प्रयासों को सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट के रूप में देखते हैं या इसे अपनी समस्याओं के समाधान से जोड़कर देखते हैं।

सवाल सिर्फ ‘फॉर्म’ का नहीं, ‘फैक्ट’ का भी है

प्रधानमंत्री मोदी का वडोदरा कार्यक्रम निश्चित तौर पर राजनीतिक संवाद के बदलते तरीके का उदाहरण है। BookMyShow पर रजिस्ट्रेशन, Y-शेप रैंप, 4K प्रोडक्शन और युवाओं के बीच सीधे संवाद ने इसे पारंपरिक राजनीतिक रैली से अलग बनाया।लेकिन GenZ के लिए असली परीक्षा मंच और कैमरे से आगे की है।

क्या युवाओं को रोजगार मिलेगा? क्या परीक्षा व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी होगी? क्या पेपर लीक जैसी समस्याओं पर प्रभावी कार्रवाई होगी? क्या सरकार उनकी बात सुनकर नीतियों में बदलाव करेगी?यही वे सवाल हैं जिनके जवाब आने वाले समय में यह तय करेंगे कि BJP का GenZ आउटरीच सिर्फ एक नया राजनीतिक फॉर्मेट है या वास्तव में युवाओं के साथ रिश्ते को मजबूत करने की लंबी रणनीति।वडोदरा का कार्यक्रम इस बदलाव की एक झलक जरूर दिखाता है—लेकिन GenZ का भरोसा सिर्फ ‘OG’ और ‘Flex’ जैसे शब्दों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले परिणामों से तय होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button