रक्षाबंधन: राखी के धागे में बंधा भाई-बहन का निस्वार्थ प्रेम
20 से 200 रुपये तक की राखियों से सजा बाजार, लेकिन रिश्तों की कीमत अमूल्य

जन एक्सप्रेस हमीरपुर :रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के निस्वार्थ प्रेम, समर्पण और भावनाओं का उत्सव है। यह पर्व उन बचपन की यादों को संजोता है, जब भाई-बहन कभी लड़ते, कभी हँसते, और साथ-साथ बड़े होते हैं। राखी के इस पावन अवसर पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं, जबकि भाई उन्हें जीवनभर सुरक्षा देने का वादा करता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन की शुरुआत देवी लक्ष्मी द्वारा राजा बली को राखी बांधने से हुई थी, जिससे भावनात्मक बंधन का यह सिलसिला चल पड़ा। यह त्योहार हमें भाई-बहन के रिश्ते से परे जाकर हर व्यक्ति से निस्वार्थ प्रेम और सुरक्षा के भाव के साथ जुड़ने की प्रेरणा देता है।
राखियों से सजे बाजार, दिल से जुड़े रिश्ते
रक्षाबंधन के पर्व पर हमीरपुर के बाजारों में 20 रुपये से लेकर 200 रुपये तक की रंग-बिरंगी, डिजाइनर और पारंपरिक राखियों की धूम रही। बाजारों में चहल-पहल देखने लायक थी, लेकिन इस पर्व की असली सुंदरता राखी की कीमत में नहीं, बल्कि रिश्ते की गहराई और भावना में होती है।रक्षाबंधन न केवल पारिवारिक रिश्तों को मजबूती देता है, बल्कि समाज में भाईचारे और प्रेम की भावना को भी बढ़ाता है। ऐसे त्योहार हमें याद दिलाते हैं कि किसी के जीवन में ‘रिश्ता’ केवल खून का नहीं, बल्कि दिल से भी होता है।






