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नई आबकारी नीति: पर्यावरण और गौ-संरक्षण को आएंगे 400 करोड़

चंडीगढ़  । पंचकूला स्थित श्रीमाता मनसा देवी मंदिर के अलावा प्रदेशभर में सभी धार्मिक क्षेत्रों और गुरुकुलों के आसपास अब शराब के ठेके नहीं खुल पाएंगे। सरकार ने ऐसी जगहों पर ठेकों के लाइसेंस नहीं देने का निर्णय लिया है। पिछले पांच वर्षों में एक्साइज (आबकारी) रेवन्यू में सरकार ने लगभग दोगुणा बढ़ोतरी की है। मंगलवार की शाम सीएम मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 2023-24 के लिए एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी दी गई।

आबकारी एवं कराधान मंत्री होने के नाते डिप्टी सीएम दुष्यंत सिंह चौटाला ने यह पॉलिसी टेबल की। पॉलिसी को लेकर सीएम और डिप्टी सीएम पहले भी कई बार विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकें कर चुके हैं। विस्तृत चर्चा के बाद पॉलिसी तैयार की गई। नई पॉलिसी से करीब 12 हजार करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा ने रखा है। चालू पॉलिसी ने ही सरकार 10 हजार करोड़ रुपये के करीब का राजस्व हासिल करने जा रही है।

सरकार के अनुसार, पिछले दो वर्षों में जिस लाइसेंस फीस पर फुटकर दुकानें आवंटित की गई थी, उसकी शत-प्रतिशत वसूली सरकार द्वारा की जा चुकी है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए तय किया है कि 29 फरवरी, 2024 के बाद शराब की बोतलों में पीईटी बोतलों का उपयोग बंद किया जाएगा। इतना ही नहीं, सरकार ने खुदरा परमिट शुल्क लगाने का फैसला लिया है। इस परमिट शुल्क से 400 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। यह पैसा पर्यावरण और गौ-संरक्षण में लगेगा।

नीति में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए जिला स्तर पर आईएफएल (बीआईओ) के लेबल का भी नवीनीकरण किया जाएगा। साथ ही, एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए छोटी (क्राफ्ट) ब्रेवरीज की लाइसेंस फीस कम की है। राज्य में वाइनरी को बढ़ावा देने के लिए वाइनरी की सुपरवाइजरी फीस में कटौती की है। खुदरा शराब के ठेकों की संख्या को 2500 से घटाकर 2400 किया है। पिछले साल भी इसमें 100 की कटौती करके 2600 से 2500 किया था।

एक बड़ा निर्णय लेते हुए कैबिनेट ने तय किया है कि पंचकूला में श्रीमाता मनसा देवी मंदिर के आस-पास अधिसूचित पवित्र क्षेत्रों तथा जिन गांवों में गुरुकुल चल रहे हैं, वहां शराब के ठेके नहीं खोले जाएंगे। ई-निविदा के जरिये शराब की दुकानों के लाइसेंस मिलेंगे। खुदरा शराब बिक्री जोन का आकार भी चार से घटाकर दो किया है। नई नीति में देशी शराब, भारत में बनी विदेशी शराब और आयातित विदेशी शराब (बीआईओ) के मूल कोटे में बढ़ोतरी की है।

देशी शराब और आईएमएफएल पर उत्पाद शुल्क की दरों में भी मामूली वृद्धि की गई है। अल्कोहल की कम मात्रा वाले पेय पदार्थों को बढ़ावा देने के लिए रेडी टू ड्रिंक बेवरेजेज और बीयर पर माइल्ड और सुपर माइल्ड कैटेगरी के तहत एक्साइज ड्यूटी घटा दी गई है। पब कैटेगरी (एल-10ई) यानी केवल बीयर और वाइन के उपभोग के लिए लाइसेंस शुल्क को और कम कर दिया गया है।

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