पूछता है जन एक्सप्रेस: हमीरपुर में बाबा के बुलडोजर का खौफ खत्म?
पोकलैंड मशीनों से छलनी हो रहा बेतवा का सीना!

जन एक्सप्रेस/ हमीरपुर : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही जीरो टॉलरेंस की नीति और अवैध खनन पर नकेल कसने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन हमीरपुर जिले की सरीला तहसील में हकीकत इसके उलट है। यहाँ इछौरा झिटकिरी मोरम खण्ड संख्या 25/9 पर नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए जलधारा के बीच भारी-भरकम प्रतिबंधित पोकलैंड मशीनों से अवैध खनन का खेल खुलेआम जारी है।
तस्वीरें दे रही हैं गवाही, फिर भी प्रशासन मौन
सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में वायरल हो रही तस्वीरें चीख-चीखकर गवाही दे रही हैं कि किस तरह नदी की जलधारा को रोककर मोरम निकाला जा रहा है। एनजीटी (NGT) के स्पष्ट निर्देश हैं कि खनन कार्य में भारी मशीनों का प्रयोग और जलधारा से छेड़छाड़ प्रतिबंधित है, लेकिन पट्टाधारक ए.एन. बिल्डर्स के गुर्गों को न तो नियमों की परवाह है और न ही प्रशासन का डर।
खनिज विभाग की ‘क्लीन चिट’ का खेल
सबसे बड़ा सवाल खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। आरोप है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के चलते मौके पर जाँच करने के बजाय, बंद कमरों में पट्टाधारकों को ‘क्लीन चिट’ बाँट रहे हैं। शिकायत होने पर अधिकारी मौके पर केवल ‘खानापूर्ति’ के लिए जाते हैं और रिपोर्ट में पट्टाधारक को बेगुनाह साबित कर पुरस्कृत करने का काम करते हैं।
‘कूल कैफे’ और दक्षिणा का नया अड्डा
चर्चा है कि इस अवैध साम्राज्य को बचाने के लिए नगर के एक नामचीन ‘कूल कैफे’ का सहारा लिया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो हर महीने की 15 से 20 तारीख के बीच यहाँ ‘लाइन’ लगती है, जहाँ पट्टाधारक का मैनेजर जिम्मेदारों को ‘मैनेज’ (दक्षिणा) करने का काम करता है। यही कारण है कि भारी ओवरलोडिंग और अवैध खनन के बावजूद जिलाधिकारी घनश्याम मीणा की सख्ती धरातल पर नजर नहीं आ रही।
मुख्य मुद्दे जिन पर प्रशासन को जवाब देना होगा:
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राजस्व की चपत: ओवरलोडिंग और अवैध खनन के जरिए शासन को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है।
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एनजीटी के नियमों का उल्लंघन: भारी पोकलैंड मशीनों का प्रयोग और नदी के पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँचाना।
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अधिकारियों की चुप्पी: क्या खनिज विभाग के अधिकारियों के निजी स्वार्थ शासन की सख्ती से भी बड़े हैं?









