फिर उफन पड़ी मंदाकिनी: चौथी बार बाढ़ के हालात, रामघाट की 100 से ज्यादा दुकानें जलमग्न
मध्य प्रदेश में भारी बारिश का असर चित्रकूट में दिखा; जानकीकुंड और रामघाट में जलभराव, श्रद्धालुओं और व्यापारियों में दहशत

जन एक्सप्रेस चित्रकूट (हेमनारायण हेमू): मध्य प्रदेश में जारी मूसलधार बारिश का असर अब पौराणिक नगरी चित्रकूट पर भी देखने को मिल रहा है। बीते 24 घंटे में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ा है, जिससे रामघाट क्षेत्र की 100 से अधिक दुकानें जलमग्न हो गई हैं। यह इस वर्ष चौथी बार है जब मंदाकिनी बाढ़ जैसे हालात में पहुंची है। स्थानीय व्यापारियों और श्रद्धालुओं के बीच भय का माहौल है। रामघाट और जानकीकुंड जैसे प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों में पानी भरने से आवागमन भी बाधित हो गया है।
हर साल की तरह, फिर दोहराया गया जलप्रलय का मंजर
दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि हर साल बारिश में उनके व्यवसाय का डूबना अब असहनीय हो गया है। “हम अभी पिछली बाढ़ की भरपाई भी नहीं कर पाए थे कि फिर से मंदाकिनी ने सब कुछ बहा दिया,” एक स्थानीय दुकानदार ने दुख व्यक्त करते हुए कहा।
प्रशासन सतर्क, SDRF अलर्ट पर
बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। नगर पालिका और तहसील प्रशासन की टीमें लगातार नदी किनारे मुनादी कर रही हैं और लोगों को चेतावनी दी जा रही है कि वे घाटों से दूर रहें। SDRF की टीमों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। चित्रकूट के SDM ने बताया कि “स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है। घाटों पर बैरिकेडिंग की जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत दल तैनात हैं।”
मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश के सतना, रीवा और पन्ना जिलों में हो रही लगातार बारिश मंदाकिनी नदी के जलस्तर को और भी बढ़ा सकती है। यदि वर्षा का यही क्रम जारी रहा तो आने वाले दिनों में नदी और रौद्र रूप धारण कर सकती है।
श्रद्धालुओं से अपील: घाटों से रहें दूर
रामघाट और जानकीकुंड जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं से घाटों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। घाटों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और सुरक्षा के लिहाज से पुलिस और प्रशासनिक टीमें मौके पर तैनात की गई हैं।
स्थायी समाधान की मांग: “हर साल बह जाता है सबकुछ”
बार-बार की बाढ़ से क्षुब्ध स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक नदी किनारे ठोस बांध या जल नियंत्रण प्रणाली नहीं बनेगी, तब तक चित्रकूट हर साल बर्बादी झेलेगा। चित्रकूट की मंदाकिनी नदी केवल आस्था का प्रतीक नहीं, अब चुनौती बनती जा रही है। प्रशासनिक सतर्कता जरूरी है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के बिना घाट किनारे बसी जिंदगियां हर बारिश में डगमगाती रहेंगी।







