
जन एक्सप्रेस /लखनऊ :- ओरल कैंसर (मुंह के कैंसर) के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नई उम्मीद जगाई है। हाल ही में सामने आई एक रिसर्च में संकेत मिले हैं कि अल्ट्रासाउंड तकनीक का इस्तेमाल कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में प्रभावी साबित हो सकता है। यदि आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह तकनीक भविष्य में ओरल कैंसर के इलाज का एक नया और कम आक्रामक (Minimally Invasive) विकल्प बन सकती है।
क्या कहती है स्टडी?
शोधकर्ताओं के अनुसार, विशेष प्रकार की लो-इंटेंसिटी या फोकस्ड अल्ट्रासाउंड वेव्स कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जबकि आसपास के स्वस्थ ऊतकों पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ता है। प्रारंभिक प्रयोगों में इस तकनीक ने ओरल कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने और उन्हें नष्ट करने के सकारात्मक संकेत दिए हैं।
क्यों है यह तकनीक खास?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक व्यापक क्लीनिकल ट्रायल में सफल होती है, तो इससे मरीजों को पारंपरिक सर्जरी, रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी के साथ या कुछ मामलों में उनके विकल्प के रूप में बेहतर उपचार मिल सकता है। इससे इलाज के दौरान होने वाले दुष्प्रभाव भी कम हो सकते हैं।
अभी और रिसर्च की जरूरत
हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह तकनीक अभी शोध और परीक्षण के चरण में है। इसे नियमित चिकित्सा उपचार का हिस्सा बनने से पहले बड़े पैमाने पर क्लीनिकल ट्रायल और नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता होगी। इसलिए मरीजों को फिलहाल अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही मानक उपचार जारी रखना चाहिए।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि यह शोध कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। यदि भविष्य में इसके परिणाम सफल रहते हैं, तो ओरल कैंसर के इलाज में अल्ट्रासाउंड आधारित तकनीक नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।






