उत्तर प्रदेशचित्रकूट

चित्रकूट में अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन यूके के वरिष्ठ डेंटिस्टों ने रखे अपने अनुभव

डेंटल की नवीनतम तकनीकों, डिजिटल दंत चिकित्सा, दंत प्रत्यारोपण और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का हुआ प्रदर्शन

जन एक्सप्रेस चित्रकूट(हेमनारायण हेमू): दीनदयाल शोध संस्थान, इंडियन डेंटल एसोसिएशन-यूके तथा सेवा-यूके के संयुक्त तत्वावधान में चित्रकूट में ‘दंत चिकित्सा के क्षेत्र में बदलते प्रतिमान’ पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार को दीनदयाल परिसर, उद्यमिता विद्यापीठ के लोहिया भवन में तकनीकी सत्र पेरियोडोंटिस्ट का गुप्त हथियार-‘लेज़र’ पर हरियाणा की डॉ. शालू बाथला तथा आघात, आंसू और प्रत्यारोपण पर अरब देश दोहा, कतर से आए वक्ता प्रो. मोंटी दुग्गल द्वारा बच्चों और किशोरों में गंभीर और जटिल आघात के बाद अस्थि प्रबंधन और ऑटोट्रांसप्लांटेशन के लिए अभिनव दृष्टिकोण पर विस्तार से बताया गया।इंग्लैंड के डॉ. कैरी बोपिया द्वारा ऑटोजेनस 3डी बोन ग्राफ्टिंग पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके बाद दंत चिकित्सा में ‘क्या स्माइल डिजाइनिंग एक कला, विज्ञान या तकनीक है’? इस पर मुंबई के विख्यात बाॅलीवुड डेंटिस्ट डॉ संदेश मयेकर द्वारा अपनी बात रखी गई। उन्होंने बताया की मुस्कुराहट एक स्वाभाविक गुण है। मुस्कुराहट प्रसन्नता लाती है, मुस्कुराहट बिना बोले सब कुछ कहती है। मुस्कुराहट स्वाभाविक होती है इसे बनाया नहीं जा सकता। फूल की मुस्कुराहट स्वाभाविक है जबकि कोहिनूर की बनावटी है। मुस्कुराहट दंत चिकित्सा के तत्वों पर निर्भर रहती है मुस्कुराहट के लिए जीभ की बड़ी भूमिका होती है, इसका साइज सही अनुपात में होना चाहिए। सही एवं योजना बंद तरीके से निदान किया जाए तो पूर्ण मुस्कुराहट लाई जा सकती है।यूके इग्लेंड के डॉ. अशोक सेठी द्वारा प्रत्यारोपण दंत चिकित्सा में प्रकृति की नकल पर तथा लंदन के सीनियर डेंटिस्ट नरेश शर्मा द्वारा चित्रकूट में चलाए गए क्लेफ्ट और बर्न सर्जरी में सफलता, दंत चिकित्सा और सामुदायिक देखभाल के बीच सेतु का निर्माण आदि कई बिन्दुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया‌। डॉ शर्मा ने बताया कि आरोग्य धाम दंत चिकित्सा के माध्यम से आयोजित कैंपों में जन्मजात दोषों, चोटों या बीमारियों के कारण कटे फ़टे क्षतिग्रस्त त्वचा को ठीक करने का कार्य किया जा रहा है जिससे शरीर के अंगों के कार्यप्रणाली को पुनः ठीक करके उसे बहाल किया जा सके और मरीज के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करके उसके आत्मविश्वास को बढ़ाया जा सके इससे उसके आत्म सम्मान में भी वृद्धि होगी। इस वर्ष भी ट्रामा, बर्न एवं हाइपोस्पेडिया के अतिरिक्त अन्य मरीजों को भी चिकित्सा उपलब्ध कराई गई।आरोग्यधाम के वरिष्ठ दंतचिकित्सक डाॅ वरुण गुप्ता ने चित्रकूट के ग्रामीण क्षेत्रों में चलाएं जा रहे दंत शिविरों पर अपने अनुभवों को रखते हुए यहाँ की प्रमुख आवश्यकताओं और कठिनाइयों पर ध्यान केंद्रित किया। डॉ गुप्ता ने बताया कि हमने समय-समय पर कैंप लगाकर कनाडा एवं यूके लंदन के साथ मिलकर प्लास्टिक सर्जरी कैंप सफलतापूर्वक किए हैं। गत 25 वर्षों से आरोग्य धाम का दंत चिकित्सा विभाग कार्य कर रहा है। लगभग बीस हजार मरीज प्रतिवर्ष दंत चिकित्सा में पंजीकृत होते हैं। 2018 से आईडीए यूके भी अपनी सेवाएं चित्रकूट प्रोजेक्ट में दे रहा है।आरोग्यधाम से निशुल्क चिकित्सीय लाभ ले चुकी जगतगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय की छात्रा इच्छा उपाध्याय जो की बचपन में पूरी तरह जल चुकी थी जिसके चलते दोनों हाथों की मांसपेशियां पूरी तरह सिकुड़ चुकी थी और वह अपने दोनों हाथों से काम करने में भी पूरी तरह असक्षम थी। कुमारी इच्छा ने अपने अनुभव में बताया कि उसके पिता ने कर्ज लेकर लगभग 2 लाख रुपये लखनऊ इलाज में खर्च भी किया परन्तु कोई लाभ नही हुआ और लगभग इतना ही खर्च पुनः सर्जरी पर लगना था। फिर उसने श्रद्धेय नाना जी देशमुख से मुलाकात की और अपने इलाज के लिए आग्रह किया, उस समय आरोग्य धाम के दंत चिकित्सा में बर्न केसों की सर्जरी की कोई व्यवस्था नहीं थी। तब नानाजी ने उसे विश्वास दिलाया कि उसकी सर्जरी की व्यवस्था कराएंगे फिर आरोग्य धाम के सहयोग से 2011 में मेरी पहली सर्जरी हुई। अब तक मेरे हाथ, पैर और पेट की इस तरह अलग-अलग चरणों में 13 सर्जरी के बाद आज मैं पूरी तरह से अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने हाथों से लिखने लगी हूं। मेरे माता-पिता अगर पूरी संपत्ति भी बेच देते तो मैं इन विदेशी चिकित्सकों से नहीं मिल पाती। अब में पूरी तरह स्वस्थ होकर पीएचडी की तैयारी कर रही हूँ।सम्मेलन में डेंटल की नवीनतम तकनीकों, डिजिटल दंत चिकित्सा, दंत प्रत्यारोपण और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन भी किया गया। जिसके अन्तर्गत दंतचिकित्सा क्षेत्र के शोधार्थियों एवं छात्रों हेतु नवाचारों, सेवा, शोध एवं शिक्षा के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के विषय में बहुमूल्य जानकारी पाने का अवसर मिल रहा है।

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