धर्मपथ चौड़ीकरण से विस्थापित हो रहे दर्जनों दुकानदारों का फूटा गुस्सा

जन एक्सप्रेस/अयोध्याधाम: धर्मपथ चौड़ीकरण परियोजना की जद में आ रही दुकानों को लेकर अयोध्या के दर्जनों दुकानदारों का आक्रोश एक बार फिर फूट पड़ा है। प्रभावित व्यापारियों ने शनिवार को एक प्रेसवार्ता कर प्रशासन पर मनमानी व जबरन अधिग्रहण का आरोप लगाते हुए अपनी पीड़ा मीडिया के सामने रखी। व्यापारियों ने बताया कि उनकी दुकानें वर्ष 2003 में अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा तयशुदा रकम पर बाकायदा बैनामा कराकर वैध रूप से खरीदी गई थीं। लेकिन बीते 4-6 महीनों से चौड़ीकरण कार्य में लगे अधिकारी बिना किसी लिखित नोटिस के मौखिक रूप से अधिग्रहण की बात कर रहे हैं, जिससे दुकानदारों में भय और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि बार-बार टीम के दबाव में उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। रोजी-रोटी की चिंता में वे विगत कई महीनों से असहज जीवन जीने को मजबूर हैं। उल्लेखनीय है कि दुकानदारों ने 16 अप्रैल को उच्च न्यायालय, लखनऊ खण्डपीठ में एक याचिका दाखिल की थी, जिस पर माननीय न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अधिग्रहण केवल नियमों के तहत अथवा सहमति के आधार पर ही किया जाए।
व्यापारियों ने यह भी बताया कि शासन द्वारा यह मंशा जाहिर की गई थी कि दुकान के बदले दुकान दी जाएगी, और अयोध्या में ऐसी कई जगहें हैं जहाँ वैकल्पिक रूप से दुकानें बनाकर समायोजन संभव है। व्यापारियों ने सुझाव दिया कि धर्मपथ पर ही विकास प्राधिकरण की लगभग 100 फुट लंबी जमीन मौजूद है, जहाँ विस्थापित दुकानदारों के लिए दुकानें बनाकर पुनः बसाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त संत तुलसीदास घाट रोड के पास कुष्ठ आश्रम क्षेत्र और बंधा तिराहे से बिजली कार्यालय मार्ग पर भी पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है। प्रेसवार्ता के दौरान दुकानदारों ने प्रशासन पर बेरुखा रवैया अपनाने और जबरदस्ती का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि 28 मई को चौड़ीकरण टीम द्वारा उन्हें जबरिया परेशान किया गया, जिसकी वह घोर निंदा करते हैं व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने बलपूर्वक दुकानें अधिग्रहण करने का प्रयास किया, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।






