उत्तर प्रदेशगाजियाबाद

आवारा कुत्तों की समस्याओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हुए दिल्ली एनसीआर की जनता

पशु प्रेमियों की दबंगई पर लगेगी लगाम पशु प्रेमियों को मिली सख्त हिदायत खुश हुए सोसायटी निवासी

जन एक्सप्रेस, गाजियाबाद: उच्चतम न्यायालय द्वारा आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या की समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार सहित दिल्ली एनसीआर के सरकारी संस्थानों क्षेत्रीय निकायों सभी आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर शेल्टर होम में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली एनसीआर की आम जनता ने हर्ष की लहर दौड़ गई है। जनता इस फैसले को बड़ी राहत और पशु प्रेमियों के दबंगई से मुक्ति के रूप में देख रहा है। क्योंकि पशु प्रेमियों के संगठन और कार्यकताओं द्वारा आवारा कुत्तों को लेकर तमाम रिहायशी सोसायटियों में अशांति का वातावरण बना रखा था । अनेक मामलों में थानों में।एफआईआर तक की नौबत आई थी। जिसमें प्रशासन की उदासीनता जग जाहिर थी। अब उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस को भी कानूनी कार्यवाही का आधार मिल गया है। अब पशु प्रेम के नाम पर दुकान चलाने वाले लोगों को जनता के हितों को अनदेखा करना भारी पड़ेगा ।

*सरकार और निकायों की जिम्मेदारी तय होगी*
11 अगस्त 2025 को उच्चतम न्यायालय में जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने इस मामले में एक रिपोर्ट के बाद स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि दिल्ली एनसीआर में आवारा कुत्तों की समस्याओं को “अत्यंत गंभीर ” है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 8 हफ्तों के भीतर आवारा कुत्तों के खिलाफ़ सरकार और निकाय सख्त कदम उठाते हुए उन्हें शेल्टर होम में स्थानांतरित करें । कोर्ट ने कहा कि जिम्मेदार संस्थाएं आवारा कुत्तों के पकड़ने का लक्ष्य निर्धारित करें और उनके शेल्टर होम ,नसबंदीनौर टीकाकरण के लिए आवश्यक कार्यवाही करें। कुत्तों को किसी दशा में सड़कों, कालोनियों या सार्वजनिक स्थानों पर वापस नहीं छोड़ा जाय । इसके साथ ही कुत्तों के काटने की शिकायतों के लिए एक हेल्पलाइन शुरू किया जाय जो शिकायत मिलते ही 4 घंटे के अंदर शिकायत पर कार्यवाही हो । अगर कोई इस प्रक्रिया में बाधा का कारक बने तो उसके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही हो यह भी सुनिश्चित किया है।

*आवारा कुत्तों पर क्यों लिया फैसला*
एक रिपोर्ट में आंकड़ों के आधार उच्चतम न्यायालय द्वारा लिया गया स्वतः संज्ञान आंकड़ों पर आधारित था । आधिकारिक आंकड़ों की माने तो 2025 में दिल्ली जैसे राज्य में 35000 से ज्यादा कुत्तों के काटने के मामले दर्ज हुए । रेबीज़ से लगभग 54 मौतें हुई ,जिसमें 6 साल की बच्ची की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था । कोर्ट ने फैसले में कहा कि बच्चों और बुजुर्गों को हम किसी हालत में रेबीज का शिकार नहीं बनने दे सकते हैं।माननीय न्यायालय के आदेश के बाद दिल्ली एनसीआर की जनता में खुशी की लहर है। रिहायशी कालोनियों और सोसायटियों में लगातार झगड़े का कारण आवारा कुत्ते बन रहे थे । पशु प्रेमी नागरिक और उनका संरक्षण करने वाली संस्थाओं के तथाकथित कार्यकर्ता नागरिकों और सोसायटियों के लिए लगातार सिरदर्द साबित हो रहे थे । पुलिस प्रशासन भी ऐसे मुद्दों पर असहाय सा बना रहता था । अब उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस भी सक्रिय रूप से कोई ठोस कार्यवाही कर सकेगी।

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