उत्तराखंडदेहरादून

धराली आपदा के 35 दिन बाद फिर गूंजे जय गंगे के जयकारे

गंगोत्री धाम यात्रा बहाल, शटल सेवा से 24 वाहनों में पहुंचे 170 श्रद्धालु

जन एक्सप्रेस उत्तरकाशी/देहरादून। धराली क्षेत्र में आई आपदा के 35 दिन बाद गंगोत्री धाम एक बार फिर श्रद्धालुओं की आस्था से गुलजार हो उठा। मंगलवार को जनपद मुख्यालय उत्तरकाशी में रुके हुए यात्रियों को शटल सेवा के जरिए 24 वाहनों में गंगोत्री धाम भेजा गया, जहां सभी श्रद्धालुओं ने मां गंगा के दर्शन कर गंगाजल संग्रह किया।

शटल सेवा से चरणबद्ध ढंग से यात्रा संचालन शुरू

गंगोत्री हाईवे बार-बार अवरुद्ध होने की वजह से पिछले तीन दिन तक यात्रा शुरू नहीं हो पाई थी। लेकिन मंगलवार को मौसम अनुकूल होते ही प्रशासन ने शटल सेवा से यात्रा का संचालन शुरू कर दिया।
गुजरात, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत से पहुंचे 170 श्रद्धालुओं ने सुरक्षित यात्रा करते हुए दर्शन किए और जनपद मुख्यालय लौट आए।

व्यापारियों और होटल व्यवसायियों को राहत की सांस

गंगोत्री धाम के व्यापारी सतपाल पंवार ने बताया कि यात्रा की दोबारा शुरुआत से व्यवसायिक गतिविधियों में उम्मीद की लौ जगी है। अभी धाम में तीन से चार दुकानें ही खुली हैं, लेकिन यात्रियों की संख्या बढ़ने पर जल्द ही ढाबे, लॉज और दुकानें फिर से खुलने लगेंगी।

11-12 सितंबर की बुकिंग से उत्साह

जिला होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र मटूड़ा ने कहा कि यात्रा शुरू होने से चारधाम यात्रा से जुड़े कारोबारियों में नई ऊर्जा आई है।
11 और 12 सितंबर को यात्रियों की अच्छी बुकिंग है। प्रशासन के निर्देशानुसार फिलहाल यात्रा शटल सेवा के माध्यम से ही संचालित की जाएगी।

यमुनोत्री मार्ग अब भी बंद, गर्भवती महिला एयरलिफ्ट

इस बीच यमुनोत्री हाईवे लगातार 17वें दिन भी बंद रहा। रास्ता बंद होने के कारण खरसाली गांव से एक गर्भवती महिला को एयर लिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश भेजा गया। यह दर्शाता है कि आपदा का असर अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

प्रशासन और स्थानीय समाज का संयुक्त प्रयास रंग लाया

गंगोत्री यात्रा बहाली के पीछे जिला प्रशासन, होटल एसोसिएशन और स्थानीय समुदाय की समन्वित योजना रही।
बीते शनिवार को हुई संयुक्त बैठक में यात्रा बहाली का निर्णय लिया गया था, जिसमें तय हुआ था कि चार दिन तक यात्रियों को शटल सेवा से गंगोत्री भेजा जाएगा।

अब उम्मीदें फिर से जगीं

गंगोत्री धाम में यात्रा की रफ्तार भले धीमी हो, लेकिन आस्था का कारवां फिर से चल पड़ा है।
स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अगर मौसम ने साथ दिया, तो जल्द ही यात्रा अपने पूर्ववर्ती चरम पर लौट आएगी और आर्थिक गतिविधियां भी रफ्तार पकड़ेंगी।

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