
जन एक्सप्रेस/हरिद्वार: देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में इक्वाडोर के डिवाइन वैल्यूज़ स्कूल से आए 18 सदस्यीय अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल की आठ दिवसीय शैक्षणिक यात्रा का समापन हुआ। यह यात्रा भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा और जीवनदर्शन के वैश्विक प्रसार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। प्रशिक्षण के दौरान विदेशी मेहमानों ने विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ. चिन्मय पंड्या से भी भेंट की और भारत की आध्यात्मिक तथा वैज्ञानिक विरासत के विभिन्न आयामों पर प्रेरणादायक मार्गदर्शन दिया।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यशाला प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और वैश्विक जिज्ञासा के सुंदर संगम का प्रतीक है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार को एक नई दिशा प्रदान करेगा, जिससे वैश्विक शांति और सद्भाव की स्थापना में सहायता मिलेगी।
प्रतिनिधिमंडल ने अपने प्रवास के दौरान आयुर्वेद, पादप चिकित्सा, यज्ञोपैथी, मर्म चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा और भारतीय वैदिक ज्ञान प्रणालियों पर केंद्रित गहन प्रशिक्षण एवं अध्ययन सत्रों में भाग लिया। इस दौरान उन्हें प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों और समग्र जीवन शैली के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
समापन समारोह में विदेशी प्रतिभागियों ने भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों, विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण की गुणवत्ता और उत्कृष्ट आतिथ्य के प्रति गहरी प्रशंसा की एवं आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव बलदाऊ देवांगन ने बताया कि इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय आदान-प्रदान कार्यशाला भारत की वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को साकार करते हैं और विश्व पटल पर भारतीय ज्ञान को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।






