कोडीन सिरप विवाद पर सदन में संग्राम, सपा का वॉकआउट, सरकार पर गंभीर आरोप

जन एक्सप्रेस/लखनऊ।कोडीन युक्त कफ सिरप के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में सोमवार को तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। सरकार की कार्रवाई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान से नाराज समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। सपा ने सरकार पर “गलत बयानी, तानाशाही रवैये और बड़े मगरमच्छों को बचाने” का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की।कार्यवाही शुरू होते ही सपा विधायक पंकज पटेल (मुंगराबादशाहपुर, जौनपुर) ने प्रदेश में बढ़ते कैंसर मामलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देश में कैंसर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और उत्तर प्रदेश इसमें सबसे आगे है। सपा सरकार के दौरान स्थापित कैंसर संस्थानों का सही संचालन नहीं हो पा रहा है। जौनपुर में मुख कैंसर के मामले ज्यादा हैं, क्योंकि यहां खुलेआम तंबाकू, पान मसाला और दोहरा बिक रहा है। उन्होंने इन पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की।चंदौली से सपा विधायक प्रभु नारायण ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में असाध्य रोगों के इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है। मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलने वाली सहायता देर से पहुंचती है, जिसके चलते कई मरीज दम तोड़ देते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली को लेकर सरकार को घेरा।इस पर उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने जवाब देते हुए कहा कि 30 वर्ष से कम उम्र के लोगों की नियमित जांच कराई जा रही है। सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर जांच की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा केंद्रीय बजट में की गई घोषणा के तहत प्रदेश के 67 जिलों में कैंसर डे-केयर सेंटर प्रस्तावित हैं, जिन पर काम चल रहा है। गरीब मरीजों को मुख्यमंत्री राहत कोष से लगातार सहायता दी जा रही है।इसके बाद मामला कोडीन सिरप कांड पर आ गया। सपा विधायक अतुल प्रधान ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जहरीली सिरप के इस कांड में बड़े और प्रभावशाली लोग शामिल हैं। उन्होंने सुशांत गोल्फ सिटी में पकड़ी गई गाड़ियों, कथित तौर पर सत्ताधारी दल से जुड़े नेताओं और करोड़ों की संपत्ति का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई सिर्फ दिखावा है और असली गुनहगार बचाए जा रहे हैं। माइक बंद होने के बावजूद अतुल प्रधान अपनी बात कहते रहे, जिससे सदन में हंगामा बढ़ गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नेता विपक्ष ने सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले मुद्दा उठाया, लेकिन तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में कोडीन सिरप से किसी की मौत नहीं हुई है। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है और सबसे बड़े सेलर का लाइसेंस रद्द किया गया है। उन्होंने दावा किया कि कोडीन सिरप का उत्पादन उत्तर प्रदेश में नहीं होता, बल्कि अन्य राज्यों से आने वाले मामलों में कार्रवाई हुई है। वाराणसी, कानपुर और गाजियाबाद से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टर के परामर्श से दी जाने वाली दवाओं पर 134 फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे नेटवर्क में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों के खातों से लेन-देन के प्रमाण मिले हैं और समय आने पर बुलडोजर भी चलेगा। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से कहा, “चिल्लाने से सच नहीं बदल जाएगा।”इस दौरान सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय ने सरकार के बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सत्ता पक्ष तथ्यों को छिपा रहा है। इसके बाद सपा विधायकों ने “गलत बयानी नहीं चलेगी, तानाशाही बंद करो” के नारे लगाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।सदन में हुए इस हंगामे के बाद राजनीतिक गलियारों में कोडीन सिरप कांड और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बहस और तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार पर बड़े दोषियों को बचाने का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार कार्रवाई को पर्याप्त बताते हुए विपक्ष को ही कटघरे में खड़ा कर रही है।






