जौनपुर में चाइनीज मांझे पर सत्र न्यायालय सख्त, पुलिस जांच का रास्ता साफ

जन एक्सप्रेस, जौनपुर: जिले में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से हो रही मौतों और हादसों पर सत्र न्यायालय ने बड़ा और अहम कदम उठाया है। अधिवक्ता आशीष शुक्ला पर हुए जानलेवा हमले के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जौनपुर ने 05 जनवरी 2026 को उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली है।
सत्र न्यायालय ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के उस आदेश पर नोटिस जारी किया है, जिसमें गंभीर अपराध की शिकायत को केवल साधारण परिवाद मानते हुए पुलिस जांच से इनकार कर दिया गया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी 2026 को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से यह मुकदमा अधिवक्ता विकास तिवारी लड़ रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
घटना 13 जनवरी 2025 की है। अधिवक्ता आशीष शुक्ला अपने साथी अधिवक्ता शिवराज यादव उर्फ भैयालाल के साथ मोटरसाइकिल से न्यायालय से घर लौट रहे थे। शास्त्री पुल के पास पतंग उड़ा रहे अज्ञात लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे प्रतिबंधित चाइनीज मांझे में दोनों फंस गए।
इस हादसे में शिवराज यादव के चेहरे और गर्दन पर गंभीर चोटें आईं, जबकि आशीष शुक्ला भी घायल हुए। दोनों को यश हॉस्पिटल में इलाज कराना पड़ा। आरोप है कि पतंग उड़ा रहे लोग घटना के दौरान तालियां बजाते और हंसते रहे, जिससे यह घटना और भी अमानवीय बन गई।
पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल
पीड़ितों ने थाना लाइनबाजार में शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। पुलिस अधीक्षक को आवेदन देने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर आशीष शुक्ला ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की, लेकिन इसे परिवाद मान लिया गया।
अब सत्र न्यायालय द्वारा पुनरीक्षण याचिका स्वीकार किए जाने से पुलिस जांच का रास्ता खुल गया है।
शिक्षक संदीप तिवारी की मौत का जिक्र
सबसे दुखद पहलू यह है कि जिस स्थान पर अधिवक्ता आशीष शुक्ला के साथ हादसा हुआ था, करीब एक साल बाद उसी जगह शिक्षक संदीप तिवारी की चाइनीज मांझे से गला कटने के कारण मौत हो गई। अधिवक्ता विकास तिवारी का कहना है कि यदि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो संभवतः यह जान बचाई जा सकती थी।
NGT आदेशों की खुली अवहेलना
यह मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के 2017 के आदेशों की खुली अवहेलना को भी उजागर करता है, जिसमें नायलॉन, सिंथेटिक, प्लास्टिक या सीसा लेपित मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
अधिवक्ता विकास तिवारी का बयान
अधिवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हर साल चाइनीज मांझे से घायल या मारे जाने वाले सैकड़ों निर्दोष लोगों की आवाज है। सत्र न्यायालय का यह फैसला पुलिस को जवाबदेह बनाएगा और कानून के सख्त पालन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने जनता से अपील की कि पतंग उड़ाने में केवल सुरक्षित सूती धागे का ही प्रयोग करें और प्रतिबंधित मांझे की बिक्री या उपयोग की सूचना तुरंत पुलिस को दें।






