उत्तर प्रदेशचित्रकूट

उठो डीएफओ अब आंखे खोलो,वन माफियाओं पर एक्शन लो!

रानीपुर टाइगर रिजर्व पर वन अफसरों की सुस्ती की काली छाया ,एसडीओ और रेंजर को मिली जाँच, कहा जल्द सौपेंगे रिपोर्ट

जन एक्सप्रेस/चित्रकूट।(सचिन वन्दन) उजड़ रहे वनों को लेकर कोई भी फ़िक्रमंद नहीं है। सरकार वनों को हराभरा करने पानी की तरह पैसा बहा रही है। नेतृत्वकर्ता ठीक नहीं होने से वन विभाग में अंधेरगर्दी मची है। कुल मिलाकर रानीपुर टाइगर रिजर्व को वन अफसरों के सुस्ती की काली छाया लगी है। अधिकारी अपनी जिम्मेदारी कितनी वफ़ादारी से निभा रहे हैं, इसका ज्वलंत उदाहरण रानीपुर टाइगर रिजर्व में सक्रिय वन माफियाओं निष्क्रिय वनकार्मियों से लगाया जा सकता है। बावजूद चित्रकूट डीएफओ कुछ एक्शन लेने के बजाय आँखों में पट्टी बांधकर बैठे हैं। डिप्टी डायरेक्टर रानीपुर टाइगर रिजर्व प्रत्यूष कटियार के ट्रेनिंग में जाने के बाद से वन विभाग का पूरा सिस्टम निरंकुश हो गया है। महोबा डीएफओ नरेन्द्र सिंह को उप निदेशक रानीपुर टाइगर रिजर्व का चार्ज मिलते ही जंगल में जंगल राज कायम हो गया। जिन अधिकारियों के कंधो में वनों और वन्यजीवों की रखवाली का जिम्मा हो अगर वह ही माफियाओं को संरक्षण देने लगे तो समझ लीजिए अस्तित्व मिटने में जरा भी देर नहीं लगती। रानीपुर टाइगर रिजर्व में इन दिनों वन माफियाओं का अधाधुंध राज चल रहा है। रानीपुर टाइगर रिजर्व के वन परिक्षेत्र मारकुंडी भाग – 2 के जंगल की जमीन पर पेड़ों को नष्ट कर मैदान बना लिए गया है। सैकड़ों हरेभरे पेड़ों को मूल सहित उखाड़कर जंगल को समतल बना दिया है। यहां तक कि टाइगर रिजर्व के कोर जोनएरिए में बोरवेल के साथ पक्का निर्माण भी कर लिया गया है। जबकि यह सब नियमों के विरुद्ध हैं। जो माफिया जंगलों का अस्तित्व मिटा रहे हैं, वह अक्सर वन अफसरों के साथ वृक्षारोपण व अन्य कार्यक्रमों के दौरान साथ में फोटो खिंचाकर पर्यावरण के संरक्षण का ढोंग रचते हैं। ऐसे में वन अफसरों की कार्यशैली कटघरे में है। वन सम्पदा के दोहन को लेकर पर्यावरण प्रेमियों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। बिष्णु पाण्डेय, परमानन्द, रोहित आदि पर्यावरण प्रेमियों ने शासन को पत्र लिखकर वनों और वन्यजीवों के बचाव के साथ दोषी अधिकारियों को दण्डित करने की मांग की है।
न्यूनतम वेतनमान के संयोजन पर खड़े हो रहे सवाल
चित्रकूट डीएफओ नरेन्द्र सिंह जब से चार्ज सम्हाला है, तबसे डेली वेसेज़ कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान चयन में सबसे अधिक ध्यान है। वन विभाग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इसका सबसे बड़ा कारण मोटी रकम लेकर चयनित करना है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन फारेस्ट वाचरों का 09-11-2023 से 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो रहा था, कोर्ट के आदेश पर उन सभी कर्मचारियों का चयन जनवरी 2025 में जब कर दिया गया तो अब किन लोगों का चयन किया जा रहा है? 09-11-2023 से 10 वर्ष पूरा होने पर इन्हे जनवरी 2025 में क्यों नहीं किया गया? ऐसे में चित्रकूट डीएफओ के कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं। सूत्रों ने तो यहाँ तक बताया कि जिसके फारेस्ट विभाग का दूर-दूर तक वास्ता न रहा हो उसका चयन भी न्यूनतम वेतनमान में किया गया है, जो नियम के विरुद्ध है। प्रमोटी डीएफओ नरेंद्र सिंह एक महीने बाद रिटायर होने की जल्दबाजी में पैसा कमाने की लालच में गैरकानूनी कार्य करने में अधिक जल्दबाजी कर रहे हैं।
आखिर क्यों नहीं हटा एक दशक से जमा वनकर्मी ? 
एक दशक से कुंडली मारकर बैठा वनकर्मी मनमौजी हैं। ऐसे कर्मचारियों पर वन विभाग के अधिकारियों की कोई लगाम नहीं है। सबसे महतत्वपूर्ण बात तो यह है कि इन कर्मचारियों का प्रमोशन होने के बाद भी स्थानांतरण नहीं हुआ, एक दशक का लम्बा अरसा गुजर गया। वन रक्षक से वन दारोगा में पदोन्नत हो गए लेकिन आज भी अंगद की तरह पैर जमाये हुए हैं। ऐसे में सरकार की तबादला नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कर्मचारियों के पुराने होने की वजह से अधिकारियों से उनके मधुर संबंध होने से उनका कोई बालबाका भी नहीं कर सकता। यहां तक कि इनकी इजाजत के बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता। अधिकारी इन कर्मचारियों से ही सलाह लेते हैं। यही कारण है कि इन कर्मचारियों के कालर फुल टाइट रहते हैं, इनको जरा भी भय नहीं है। उधर विभाग के नए कर्मचारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि नए कर्मचारी दिन भर काम में लगे रहते हैं बाकी के पुराने कर्मचारी समय गुजारते दिखते हैं। वहीं जिला मुख्यालय से अधिकारियों के दौरे की भनक सबसे पहले इनको लगती है। इस कारण यह पहले से ही वहां मौजूद हो जाते हैं। इसलिए अधिकारियों को लगता है, इनसे ज्यादा कर्मठ कर्मचारी कोई नहीं है। वैसे तो जनपद के अधिकांश  वन रेंजों में ऐसे कर्मचारियों की भरमार हैं। उदाहरण के तौर पर रानीपुर टाइगर रिजर्व के वन परिक्षेत्र मारकुंडी भाग -1 में तैनात वन दारोगा रामभवन मारकुंडी में तकरीबन एक दशक से जमा हुआ हैं। अब इनकी रुचि वन और वन्य जीवों की सुरक्षा के बजाय अवैध कमाई की ओर अधिक है। चाहे जंगलों की अवैध कटाई हो या पत्थर व मौरंग का अवैध कारोबार इनकी अनुमति से ही होता है।
एसडीओ और रेंजर को मिली जाँच
रानीपुर टाइगर रिजर्व में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच वन विभाग के एसडीओ राजीव रंजन व क्षेत्रीय वन अधिकारी मोहम्मद नदीम को दी गई है। जानकारी के अनुसार दोनों अधिकारी बुधवार को जाँच के लिए सम्बंधित वन रेंज के जंगल में पहुंचकर अवैध कटान का अवलोकन किया है। बातचीत में ज्यादा कुछ न बोलते हुए बताया कि जाँच की जा रही है। जल्द ही जाँच की रिपोर्ट डिवीज़न के अधिकारियों को सौंपी दी जाएगी।

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