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सोना-चांदी ने रच दिया इतिहास, सेफ हेवन निवेश की दौड़ में कीमती धातुओं का रिकॉर्डतोड़ उछाल

जन एक्सप्रेस/नई दिल्ली/मुंबई: देश और दुनिया के सर्राफा बाजार में शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। सोने और चांदी की कीमतों ने सभी पुराने आंकड़े पीछे छोड़ते हुए नए रिकॉर्ड कायम कर दिए। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में कमजोरी की आशंका और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती के संकेतों के बीच निवेशकों का रुझान तेजी से सुरक्षित निवेश यानी सेफ हेवन एसेट्स की ओर बढ़ गया।

इसका सीधा असर घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स से लेकर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स तक देखने को मिला, जहां कीमती धातुओं में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई।


चांदी ने लगाई रिकॉर्ड छलांग

शुक्रवार को चांदी ने निवेशकों को हैरान कर दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च अनुबंध वाली चांदी में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। कारोबार के दौरान चांदी 12,638 रुपये की भारी तेजी के साथ 3,39,927 रुपये प्रति किलोग्राम के नए ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई।

गौरतलब है कि इससे पहले ही बुधवार को चांदी ने 3.35 लाख रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड बनाया था, जिसे महज दो दिन के भीतर तोड़ दिया गया। इस तेज उछाल ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है।


 सोने की चमक भी बनी रही

चांदी के साथ-साथ सोने ने भी ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। फरवरी अनुबंध वाला सोना लगातार पांचवें कारोबारी दिन मजबूत हुआ। शुक्रवार को सोने की कीमत 2,885 रुपये की तेजी के साथ 1,59,226 रुपये प्रति 10 ग्राम के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।

एक दिन पहले गुरुवार को सोना 1,56,341 रुपये पर बंद हुआ था, लेकिन शुक्रवार को निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने इसे नए शिखर पर पहुंचा दिया।


 अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दिखी तेजी

केवल भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं की चमक बनी रही।

कॉमेक्स (COMEX) पर—

  • चांदी पहली बार 99 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गई

  • वहीं सोना 1.15% की तेजी के साथ 4,970 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता नजर आया

विशेषज्ञों के अनुसार यह तेजी केवल सट्टेबाजी नहीं, बल्कि वैश्विक निवेश धारणा में बड़े बदलाव का संकेत है।


 क्यों बढ़ रही हैं सोने-चांदी की कीमतें?

बाजार जानकारों का मानना है कि मौजूदा तेजी कई वैश्विक कारणों का संयुक्त परिणाम है।

🔹 फेडरल रिजर्व की भूमिका

अमेरिका में महंगाई के नरम संकेतों के चलते यह उम्मीद बढ़ गई है कि फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इससे डॉलर कमजोर हुआ है और सोने-चांदी जैसे गैर-ब्याज वाले निवेश विकल्प आकर्षक बन गए हैं।

🔹 डॉलर में कमजोरी

डॉलर इंडेक्स में गिरावट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की मांग बढ़ी है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा है।

🔹 भू-राजनीतिक तनाव

मध्य पूर्व और यूरोप समेत कई क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को जोखिम भरे शेयर बाजार से हटाकर सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया है।

🔹 शेयर बाजार में अस्थिरता

वैश्विक शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के कारण बड़े निवेशक पोर्टफोलियो में सोने-चांदी की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।


निवेशकों के लिए क्या संकेत?

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तेजी केवल अल्पकालिक नहीं लगती। यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहते हैं, तो आने वाले समय में सोने और चांदी में और तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दी जा रही है, क्योंकि रिकॉर्ड स्तर पर मुनाफावसूली कभी भी कीमतों में अस्थायी गिरावट ला सकती है।


 एक्सपर्ट की राय

ऑगमोंट की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी का कहना है—

“मार्च 2020 के बाद यह कीमती धातुओं के लिए सबसे अनुकूल समय है। वैश्विक अनिश्चितता ने सोने-चांदी को फिर से निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है।”

वहीं आशिका ग्रुप के सीबीओ राहुल गुप्ता के अनुसार—

“एमसीएक्स पर सोने की रिकॉर्ड तेजी वैश्विक जोखिमों, डॉलर में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संकेतों का परिणाम है।”


 आगे क्या?

बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि—

  • फेड दरों में कटौती करता है

  • डॉलर दबाव में रहता है

  • वैश्विक तनाव बना रहता है

तो सोना और चांदी आने वाले महीनों में और नए स्तर छू सकते हैं। हालांकि निवेशकों को भावनाओं में बहने के बजाय रणनीति के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

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