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कुरारा में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई संत रविदास जयंती

जन एक्स्प्रेस/हमीरपुर: कुरारा नगर पंचायत क्षेत्र में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती इस वर्ष भी अत्यंत श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाई गई। यह आयोजन सामाजिक समरसता, भाईचारे और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बना। कार्यक्रम में नगर के सैकड़ों लोगों की सहभागिता देखने को मिली, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और प्रेरणादायक हो उठा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सदर विधायक डॉ. मनोज प्रजापति रहे, जबकि नगर पंचायत कुरारा की तेजतर्रार अध्यक्ष आशा रानी कबीर की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सबसे पहले अतिथियों द्वारा रिबन काटकर नव-निर्मित रविदास भवन का उद्घाटन किया गया। इसके पश्चात संत गुरु रविदास जी के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर पुष्पमाला अर्पित की गई और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई।

इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष आशा रानी कबीर ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि “संत रविदास जी का जीवन और उनके विचार आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने समानता, प्रेम, भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनका संदेश हमें जाति, भेदभाव और ऊंच-नीच से ऊपर उठकर मानवता की सेवा करने का रास्ता दिखाता है।”

उन्होंने संत रविदास जी के प्रसिद्ध दोहे “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मन शुद्ध और विचार सकारात्मक हों, तो हर स्थान पवित्र हो जाता है। समाज को इसी भाव के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

मुख्य अतिथि सदर विधायक डॉ. मनोज प्रजापति ने अपने संबोधन में कहा कि संत रविदास जी केवल एक संत नहीं, बल्कि समाज सुधारक थे। उन्होंने ऐसे समय में समानता और सामाजिक न्याय की बात की, जब समाज अनेक कुरीतियों से जूझ रहा था। विधायक ने कहा कि आज जरूरत है कि युवा पीढ़ी संत रविदास जी के विचारों को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाए।

कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने संत रविदास जी के जीवन दर्शन और शिक्षाओं को गीत-संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

नगर के वरिष्ठ नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारे को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं। वक्ताओं ने संत रविदास जी के विचारों को जीवन में अपनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा आए हुए अतिथियों और नागरिकों का आभार व्यक्त किया गया। शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि संत रविदास जी की शिक्षाएं आज भी समाज को एक नई दिशा देने में सक्षम हैं।

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