फोटो-आधारित चालान अब कोर्ट में मान्य नहीं, ड्राइवर के हस्ताक्षर होंगे जरूरी

जन एक्सप्रेस/नई दिल्ली/लखनऊ:सुप्रीम कोर्ट ने 1 जनवरी 2026 से ट्रैफिक चालानों के संबंध में एक महत्वपूर्ण और भूराजनीतिक आदेश जारी किया है, जिसके अनुसार अब केवल वाहन की आगे-पीछे की फोटो खींचकर बने चालान अदालतों में सबूत के रूप में मान्य नहीं होंगे। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी ट्रैफिक उल्लंघन के कारण चालान अदालत में चुनौती के लिए जाएगा, तो उस पर गाड़ी चालक/ड्राइवर के हस्ताक्षर होना अनिवार्य होंगे।आदेश का मकसद ट्रैफिक प्रवर्तन में पारदर्शिता और प्रमाण-आधारित न्याय सुनिश्चित करना है। सुप्रीम कोर्ट की इस नई व्याख्या के तहत अब केवल तस्वीर लेना ही पर्याप्त सबूत नहीं माना जाएगा, बल्कि चालान जारी करते समय ड्राइवर के हस्ताक्षर को भी अनिवार्य शर्त बनाया गया है, ताकि किसी भी तरह की विवाद-उन्मुख या अस्पष्ट चालान प्रक्रिया से उठने वाली न्यायिक चुनौतियों को कम किया जा सके।विशेष रूप से, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस आदेश की जानकारी तेजी से फैल रही है, जिसमें बताया जा रहा है कि 1 जनवरी 2026 से लागू यह आदेश सभी वाहनों पर लागू होगा और फोटो-आधारित चालानों को अदालत समक्ष पेश करते समय वैध साक्ष्य नहीं माना जाएगा।सरकार, पुलिस और यातायात विभागों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने चालान जारी करने की प्रक्रियाओं में सुधार करें और अब ड्राइवर के हस्ताक्षर को एक अनिवार्य तत्व के रूप में शामिल करें। इससे न सिर्फ ट्रैफिक नियमों का पारदर्शी पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि न्यायिक प्राधिकरणों के समक्ष सबूत-प्रक्रिया में भी स्पष्टता आएगी।नया आदेश 1 जनवरी 2026 से लागू माना गया है, और इसके अमल में आने से अब तस्वीर-आधारित ट्रैफिक चालानों में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।






