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हिंदी के ‘शिखर पुरुष’ अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की पुण्यतिथि, भारत रक्षा दल ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

जन एक्सप्रेस/आजमगढ़ : हिंदी साहित्य जगत के देदीप्यमान नक्षत्र और खड़ी बोली के प्रथम महाकवि अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की पुण्यतिथि पर आज उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। जनपद के निजामाबाद कस्बे में, जो उनकी जन्मस्थली भी है, भारत रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया।

प्रतिमा की सफाई और सुंदरीकरण का संकल्प

पुण्यतिथि के अवसर पर भारत रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने निजामाबाद में स्थापित ‘हरिऔध’ जी की मूर्ति और आसपास के परिसर की साफ-सफाई की। कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे संगठन के अध्यक्ष हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव ने पार्क और प्रतिमा की उपेक्षित स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा:

“हरिऔध जी हमारे जनपद की अनमोल धरोहर हैं। उनकी स्मृतियों को उपेक्षित रहने देना उनके योगदान का अपमान है। आज हमने सफाई की है और शीघ्र ही हमारा संगठन इस मूर्ति और पार्क का कायाकल्प कर इसे नया रूप देगा।”

हिंदी खड़ी बोली के प्रथम महाकवि का गौरव

हरिकेश विक्रम ने हरिऔध जी के साहित्य अवदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने हिंदी खड़ी बोली का पहला महाकाव्य ‘प्रियप्रवास’ रचकर साहित्य के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया था। इस कालजयी रचना के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘मंगलाप्रसाद पारितोषिक’ से भी सम्मानित किया गया था। ऐसी महान विभूति का आजमगढ़ की धरती पर जन्म लेना पूरे जिले के लिए गौरव की बात है।

कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य

श्रद्धांजलि सभा में भारत रक्षा दल के जिलाध्यक्ष रवि, दीपक जायसवाल, हिमांशु सिंह, डॉ. धीर, कामता सोनकर, रमेश कुमार और तहसील निजामाबाद प्रभारी इंदल चौहान सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने संकल्प लिया कि वे अपने ऐतिहासिक महापुरुषों की स्मृतियों को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।

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