चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का मंगल मुहूर्त, जानें 9 दिनों की पूजा और विशेष तिथियां
भक्ति, शक्ति और साधना का पर्व शुरू—अष्टमी 26 मार्च और रामनवमी 27 मार्च को, सही विधि से करें पूजा

जन एक्सप्रेस/लखनऊ/(हेमनारायण द्विवेदी):आज से पूरे देश में पवित्र चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत हो गई है। यह पर्व श्रद्धा, भक्ति और शक्ति की उपासना का प्रतीक माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और व्रत रखकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष घटस्थापना का शुभ समय:
सुबह: 6:52 बजे से 7:53 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त (वैकल्पिक): 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
धार्मिक मान्यता है कि सही मुहूर्त में कलश स्थापना करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
नवरात्रि का महत्व
हिंदू धर्म में नवरात्रि को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इन दिनों में देवी पृथ्वी पर आकर भक्तों की प्रार्थनाएं स्वीकार करती हैं। यह पर्व नववर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष समय माना जाता है।
नौ दिनों में देवी के नौ रूप
दिन 1: मां शैलपुत्री
दिन 2: मां ब्रह्मचारिणी
दिन 3: मां चंद्रघंटा
दिन 4: मां कूष्मांडा
दिन 5: मां स्कंदमाता
दिन 6: मां कात्यायनी
दिन 7: मां कालरात्रि
दिन 8: मां महागौरी (महाअष्टमी)
दिन 9: मां सिद्धिदात्री (रामनवमी)
👉 महाअष्टमी: 26 मार्च 2026
👉 रामनवमी: 27 मार्च 2026
कैसे करें कलश स्थापना?
पूजा स्थान को साफ कर गंगाजल से शुद्ध करें
चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं
मिट्टी में जौ बोएं
जल से भरा कलश स्थापित करें
आम के पत्ते और नारियल रखें
दीप जलाकर पूजा प्रारंभ करें
विशेष मान्यता
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार से होने के कारण देवी का आगमन डोली (पालकी) में माना जा रहा है, जिसे पूरी तरह शुभ नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में दुर्गा सप्तशती पाठ करने की सलाह दी जाती है।
9 दिन, 9 रंग
हर दिन अलग रंग पहनना शुभ माना गया है—जैसे पहला दिन पीला, दूसरा हरा, तीसरा ग्रे आदि। यह रंग सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक होते हैं।
क्या न चढ़ाएं भोग में?
विशेषज्ञों के अनुसार, नवरात्रि में मां को ये चीजें अर्पित न करें:
अंजीर, नींबू, इमली, अंगूर, नाशपाती, बासी या खराब फल।






