जौनसार-बावर: महासू गौ रथ यात्रा के दूसरे दिन उमड़ा जनसैलाब, गौमाता को राष्ट्रमाता बनाने की उठी गूँज

जन एक्सप्रेस/विकासनगर: महासू गौ सेवा सहयोग समिति, जौनसार बावर की तीन दिवसीय भव्य गौ रथ यात्रा का दूसरा दिन भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। यात्रा के माध्यम से समूचे क्षेत्र में गौ सेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है।
हनोल महासू मंदिर से हुआ दूसरे दिन का आगाज
यात्रा के दूसरे दिन की सुबह हनोल स्थित महासू महाराज के प्रांगण में पूजा-अर्चना के साथ हुई।
-
सम्मान: गौ समिति ने मंदिर के पुजारी हरीशचंद्र नोटियाल को गौ माता के चित्र भेंट कर सम्मानित किया।
-
स्वागत: हनोल निवासी और समिति के संरक्षक पुरण नाथ जी ने सभी गौ भक्तों का माल्यार्पण कर स्वागत किया और गौ ग्रास (गौ सेवा) हेतु गुप्त दान देकर पुण्य कमाया।
यात्रा का मार्ग और भव्य स्वागत
हनोल से प्रस्थान कर रथ यात्रा चातरा, खुनीगाड, मोरी, जरमोला और पुरोला पहुँची।
-
सेवा भाव: पुरोला में वन विभाग की रेंज अधिकारी अमिता थपलियाल ने गौ भक्तों के लिए भोजन की व्यवस्था कर सेवा भाव का परिचय दिया, जिसके लिए समिति ने उनका आभार व्यक्त किया।
-
भक्ति का संचार: यात्रा नौगांव और लाखामंडल होते हुए शाम को केदार बाबा के दरबार, भटाड गाँव पहुँची, जहाँ ग्रामीणों ने ढोल-दमाऊ के साथ यात्रा का भव्य स्वागत किया।
“गाय एक चलता-फिरता मंदिर है”: आचार्य विपिन जोशी
भटाड गाँव के मंदिर परिसर में आयोजित धार्मिक सभा में कथा व्यास आचार्य विपिन जोशी और विवेक शरण शास्त्री ने गौ महिमा का बखान किया।
-
धार्मिक महत्व: उन्होंने कहा कि गाय के भीतर 33 कोटि देवी-देवता वास करते हैं। पूजा-पाठ में प्रयुक्त होने वाला ‘पंचगव्य’ (दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र) भी गाय से ही प्राप्त होता है।
-
अपील: विद्वानों ने गौमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने के लिए समाज के हर वर्ग से सहयोग की अपील की। रात्रि संध्या में भजनों और पारंपरिक लोक नृत्य के साथ श्रद्धालु गौ भक्ति में डूबे नजर आए।
समिति के सदस्य और पदाधिकारी
इस ऐतिहासिक यात्रा को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष सीताराम चौहान, संस्थापक आचार्य विपिन जोशी, यात्रा संयोजक रमेश चौहान, संसार चौहान, आचार्य विवेक शरण शास्त्री, बृजेश जोशी, दीपक जोशी, केशर सिंह चौहान, श्याम सिंह राठौर, बलवीर सिंह, शमशेर सिंह, विरेन्द्र चौहान और भीमदत्त डोभाल आदि सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।






