
जन एक्सप्रेस/ विकासनगर: जौनसार बावर क्षेत्र में दशकों पुराने भूमि विवाद को लेकर प्रदेश की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 1983-84 के दौरान अनुसूचित जनजातियों की भूमि को गलत तरीके से वन गुर्जरों के नाम दर्ज किए जाने के मामले में जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
क्या था पूरा मामला?
रुद्र सेना के संरक्षक राकेश उत्तराखंडी ने वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलकर एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, जौनसार बावर क्षेत्र में स्थानीय अनुसूचित जनजातियों (जौनसारियों) की पैतृक भूमि को 1983-84 के बंदोबस्त के दौरान नियमों के विरुद्ध वन गुर्जरों के नाम कर दिया गया था।
मुख्यमंत्री ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की थी, जिसमें शामिल थे:
-
उप जिलाधिकारी (SDM), त्यूनी
-
तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार
-
जिला शासकीय अधिवक्ता
जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
कमेटी ने अपनी निष्पक्ष जांच में पाया कि भूमि का हस्तांतरण वास्तव में प्रक्रियात्मक त्रुटियों और गलत तरीके से किया गया था। कमेटी की प्रमुख सिफारिशें निम्नलिखित हैं:
-
गलत बंदोबस्त का निरस्तीकरण: 1983-84 के दौरान किए गए गलत भूमि रिकॉर्ड को तत्काल रद्द किया जाए।
-
राज्य सरकार का नियंत्रण: विवादित भूमि को दोबारा राज्य सरकार के नियंत्रण में लिया जाए।
-
हक-हकूक की बहाली: जनजातीय समुदाय के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
स्थानीय समुदाय में हर्ष की लहर
इस निर्णय के बाद राकेश उत्तराखंडी ने मुख्यमंत्री और शासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा:
“यह जौनसार बावर के स्थानीय जनजातीय समुदाय के संघर्ष की जीत है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद के समाधान से क्षेत्र के लोगों में सरकार के प्रति विश्वास जगा है।”
राकेश उत्तराखंडी और रुद्र सेना लंबे समय से क्षेत्र की भूमि, जंगल और हक-हकूक की रक्षा के लिए प्रयासरत रहे हैं। स्थानीय संगठनों ने भी इस कदम को “ऐतिहासिक और साहसी” बताया है।






