उत्तरकाशी के अधिकांश स्कूल बिना स्थायी प्रधानाचार्य के संचालित, शिक्षकों का मनोबल गिरा

जन एक्सप्रेस/उत्तरकाशी: उत्तरकाशी जनपद की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। स्कूलों में स्थायी प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापकों की भारी कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जबकि शिक्षकों में पदोन्नति और पारदर्शी स्थानांतरण नीति को लेकर लगातार नाराजगी बढ़ रही है।
जानकारी के अनुसार जनपद में कुल 75 इंटर कॉलेज हैं, लेकिन इनमें केवल 4 पूर्णकालिक प्रधानाचार्य तैनात हैं। वहीं 52 हाईस्कूलों में सिर्फ 2 स्थायी प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं। यानी 95 प्रतिशत से अधिक विद्यालय बिना स्थायी मुखिया के संचालित हो रहे हैं और कामचलाऊ व्यवस्था के भरोसे शिक्षा व्यवस्था चलाई जा रही है।
शिक्षकों का कहना है कि 30 से 35 वर्षों की सेवा के बाद भी उन्हें पदोन्नति नहीं मिल रही है। विभाग में पदोन्नति के लगभग 95 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, जिससे शिक्षकों का मनोबल लगातार टूट रहा है। दूसरी ओर अन्य विभागों में कर्मचारियों और अधिकारियों को कई पदोन्नतियां मिलती हैं।
हाल ही में राम सिंह चौहान ने 35 वर्षों की सेवा के बाद बिना पदोन्नति के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। उनके इस निर्णय को शिक्षा जगत में बड़ा संदेश माना जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि पारदर्शी वार्षिक स्थानांतरण नीति लागू न होने और वेतन विसंगतियों के लंबित रहने से नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों और शिक्षक संगठनों का मानना है कि स्कूलों में स्थायी नेतृत्व न होने से अनुशासन और शैक्षणिक योजनाओं के संचालन में कठिनाई हो रही है। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार जल्द ही पदोन्नति प्रक्रिया पूरी कर पारदर्शी ट्रांसफर नीति लागू नहीं करती, तो ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन और बढ़ सकता है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शासन और शिक्षक संगठनों के बीच नियमित संवाद बेहद जरूरी है।
शिक्षकों ने मांग की है कि खाली पदों को शीघ्र भरा जाए, वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए और शिक्षा व्यवस्था में स्थायी नेतृत्व सुनिश्चित किया जाए, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।






