उत्तराखंडहरिद्वार

घर-घर अलख जगाएँगे’ संदेश के साथ कनाडा में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार

जन एक्सप्रेस/ हरिद्वार: अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के जन्मशताब्दी वर्ष के संदेश को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से शांतिकुंज के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या इन दिनों कनाडा प्रवास पर हैं। अपने प्रवास के दौरान वे विभिन्न शहरों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और मानवता के संदेश का प्रसार कर रहे हैं।

इसी क्रम में डॉ. चिन्मय पण्ड्या कनाडा के प्रमुख शहर रेजाइना स्थित हिंदू हेरिटेज मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने श्रद्धालुओं, प्रवासी भारतीयों और स्थानीय नागरिकों को संबोधित किया। मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने गुरुसत्ता के संदेश, जीवन मूल्यों और मानव कल्याण से जुड़े विचारों को साझा करते हुए आध्यात्मिक चेतना के महत्व पर प्रकाश डाला।

डॉ. पण्ड्या ने कहा कि आध्यात्मिकता व्यक्ति के जीवन को सही दिशा, संतुलन और उद्देश्य प्रदान करती है। उन्होंने युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा स्थापित रचनात्मक, नैतिक एवं समाजोन्मुखी अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया और उपस्थित लोगों से इसमें सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने “घर-घर अलख जगाएँगे, हम बदलेंगे जमाना” के प्रेरक संदेश को दोहराते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाई जा सकती है।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति ने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच भी भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक आदर्शों को अपनाकर समाज निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण और मानवता की सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाने का आह्वान किया।

संगोष्ठी का समापन सामूहिक प्रार्थना एवं शांतिकुंज टीम द्वारा प्रस्तुत प्रज्ञागीत के साथ हुआ। कार्यक्रम में शांतिकुंज परिवार के प्रतिनिधियों, प्रवासी भारतीय युवाओं और स्थानीय श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

यह आयोजन जन्मशताब्दी वर्ष के संदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने और भारतीय संस्कृति के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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