उत्तरकाशी बनेगा योग और अध्यात्म का नया केंद्र, गंगा घाटों पर बनेंगे योग-ध्यान केंद्र

जन एक्सप्रेस/ उत्तरकाशी: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले उत्तरकाशी के योग निकेतन घाट पर “हरित योग” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योग साधकों, स्थानीय नागरिकों और युवाओं ने भाग लेकर स्वस्थ जीवनशैली एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वार्ड-2 के सभासद Amrikan Puri रहे। उन्होंने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का माध्यम भी है।
अपने संबोधन में अमरीकन पुरी ने कहा कि मां गंगा के तट पर स्थित उत्तरकाशी में योग और ध्यान की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि नगर पालिका द्वारा गंगा घाटों को योग एवं ध्यान केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इस प्रस्ताव को आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा, ताकि इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
उन्होंने कहा कि गंगा तट का शांत और प्राकृतिक वातावरण योग साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त है। यदि घाटों का सुव्यवस्थित विकास किया जाए तो इससे स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
अमरीकन पुरी ने उत्तरकाशी को विश्वस्तरीय योग और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य सामने रखते हुए कहा कि जिस प्रकार Rishikesh ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग नगरी की पहचान बनाई है, उसी प्रकार उत्तरकाशी भी योग और अध्यात्म के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है। इससे देश-विदेश के पर्यटक और योग साधक यहां आकर मां गंगा के सान्निध्य में योग और ध्यान का अनुभव कर सकेंगे।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने सामूहिक योगाभ्यास किया और “स्वस्थ तन, स्वस्थ मन, हरित पर्यावरण” का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। योग प्रशिक्षकों ने योग के विभिन्न आसनों और उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी भी दी।
आयोजकों के अनुसार “हरित योग” कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को योग के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी प्रेरित करना है। कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि स्वास्थ्य और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं।






