
जन एक्सप्रेस /विकास नगर :- तहसील क्षेत्र में बाईपास के किनारे धनवंतरी अस्पताल के पास जो ज़मीन कभी फसल देती थी, वहां अब प्लॉट काटे जा रहे हैं। करीब 40 बीघा कृषि भूमि पर भूमाफिया धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग कर रहे हैं। सड़क तक बिछा दी गई है, दो-तीन मकान भी खड़े कर दिए गए हैं। एमडीडीए की अनुमति? भूमि उपयोग परिवर्तन? नक्शा स्वीकृति? कुछ नहीं। प्रशासन और विकास प्राधिकरण का खौफ यहां सिरे से गायब बता रहे हैं स्थानीय लोग।यूकेडीके के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य अरविंद तोमर ने मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया है। शिकायत में साफ लिखा है—कृषि भूमि पर बिना एमडीडीए की मंजूरी निर्माण चल रहा है, विभाग और प्रशासन दोनों सोए हुए हैं। उन्होंने अवैध निर्माण ध्वस्त करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी भी दी है कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा, उसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
बाहर से देखने पर लगता है कोई नया आवासीय इलाका बस रहा हो। अंदर जाएं तो तस्वीर अलग है। खेतों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटा जा रहा है, रास्ता काटकर कॉलोनी का ढांचा खड़ा किया जा रहा है और दो-तीन मकान भी बन चुके हैं। यह काम एमडीडीए क्षेत्र में हो रहा है, जहां कृषि भूमि पर प्लाटिंग और निर्माण के लिए प्राधिकरण की मंजूरी और भूमि उपयोग परिवर्तन अनिवार्य है। बिना इसके किया गया काम अवैध माना जाता है
देहरादून और आसपास के बाईपास इलाकों में यह कहानी नई नहीं है। शिमला बाईपास, सहसपुर, सेलाकुई, विकासनगर जैसे इलाकों में एमडीडीए पहले भी दर्जनों बीघा अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर चला चुका है। फिर भी धनवंतरी अस्पताल के पास का यह टुकड़ा अब तक बचता रहा—यही शिकायतकर्ता का आरोप है।अरविंद तोमर के पत्र का लब्बोलुआब यही है कि भूमाफिया कृषि भूमि पर बिना किसी डर के काम कर रहे हैं। एमडीडीए और जिला प्रशासन का कोई खौफ नहीं दिख रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधी कार्रवाई मांगी है,ध्वस्तीकरण और दोषियों के खिलाफ कानूनी कदम। साथ में साफ कहा है कि अगर फाइलें दब गईं या निरीक्षण सिर्फ कागजी रह गया, तो इलाका आंदोलन की राह पर उतरेगा।
स्थानीय स्तर पर यह बात इसलिए गरमा रही है क्योंकि बाईपास के किनारे जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कृषि दर पर खरीदी गई ज़मीन को प्लॉट काटकर बेचने का फॉर्मूला कई जगह चलता रहा है। खरीदार बाद में फंसते हैं—न बिजली-पानी की पक्की व्यवस्था, न रजिस्ट्री साफ, न एमडीडीए की स्वीकृति। एक दिन बुलडोजर आता है तो प्लॉट और पैसा दोनों हवा हो जाते हैं।
जेई सचिन तोमर ने कहा कि मौके पर जाकर असलिया निरीक्षण किया जाएगा। अगर बिना अनुमति काम चल रहा है तो कार्रवाई होगी। यानी फिलहाल आश्वासन यही है—देखेंगे, जांच करेंगे, फिर फैसला होगा
शिकायतकर्ता का रुख इससे सख्त है। उनका कहना है कि काम पहले से चल रहा है, सड़क बन चुकी है, मकान भी खड़े हैं। अब सिर्फ फाइल घुमाने से बात नहीं बनेगी। या तो अवैध ढांचा गिरे और दोषी पकड़े जाएं, या फिर आंदोलन की जिम्मेदारी प्रशासन खुद ले।एमडीडीए क्षेत्र में कृषि भूमि पर कालोनी बसाने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन, लेआउट प्लान की स्वीकृति और निर्माण अनुमति चाहिए। इनके बिना काटा गया प्लॉट और उठाया गया मकान दोनों अवैध श्रेणी में आते हैं। प्राधिकरण ऐसे मामलों में नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण कर सकता है। कई मौकों पर पुलिस बल के साथ जेसीबी भी उतर चुकी है
यहां सवाल यही है कि 40 बीघा जैसा बड़ा टुकड़ा, सड़क और मकान तक बन जाने के बाद भी कार्रवाई क्यों रुकी रही। यही वह बिंदु है जिस पर अरविंद तोमर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।अब गेंद प्रशासन और एमडीडीए के पाले में है। जेई ने निरीक्षण का वादा किया है। अगर मौके पर बिना अनुमति का काम मिला, तो कार्रवाई तय है—कम से कम कागजों पर तो यही लिखा जाएगा। इलाका देख रहा है कि वादा सिर्फ बयान रहता है या बुलडोजर भी आता है। कार्रवाई नहीं हुई तो शिकायतकर्ता पहले ही चेता चुके हैं,आंदोलन होगा, और उसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।






