उत्तराखंड

तीर्थ नगरी की धर्मशालाओं को खुर्द-बुर्द होने से बचाए प्रशासन

ऋषिकेश । जन विकास मंच ने तीर्थ नगरी की धर्मशालाओं को खुर्द-बुर्द होने से बचाने के लिए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। इस गंभीर मामले को लेकर मंच से जुड़े कार्यकर्ता उपजिलाधिकारी से मिले और उनसे धर्म नगरी ऋषिकेश में भू माफिया खुर्द -बुर्द होती हुई धर्मशाला को बचाने की मांग की है।

बुधवार को उत्तराखंड विकास मंच ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रेषित एक ज्ञापन भी उपजिलाधिकारी को सौंपा गया। मंच के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने बताया कि ऋषिकेश की पहचान आश्रम, धर्मशाला, मठ -मंदिरों से होती थी। योग नगरी ऋषिकेश में दो दशक पूर्व लगभग 150 धर्मशाला और आश्रम हुआ करते थे, लेकिन वर्तमान में इन धर्मशालाओं की संख्या बमुश्किल 20 से 22 के बीच रह गई है। इन बची हुई धर्मशाला,आश्रमों पर भी इन भू माफिया की गिद्ध दृष्टि लगी हुई है।

इसके परिणाम स्वरूप ऋषिकेश में हरिपुर कला के बाद चारधाम यात्रियों के ठहरने के लिए कोई उपयुक्त स्थान नहीं बचा है। इसके चलते तीर्थयात्री मुनी की रेती, रामझूला, स्वर्ग आश्रम जोक में आश्रय को चले जाते हैं। इन यात्रियों के ऋषिकेश में न ठहरने से ऋषिकेश का व्यापार बाधित होता है। ज्ञापन में भू माफिया के क्रिया-कलापों पर अंकुश लगाते हुए बची हुई धर्मशाला व आश्रमों को खुर्द बुर्द होने से बचाने और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button