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शिक्षा क्रांति के पीछे सिसोदिया का हाथ

मनीष सिसोदिया को शिक्षा क्रांति का शिल्पकार बताते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में उनके उपलब्धियों का देश भर में प्रभाव था। देश भर की सरकारों पर धीरे-धीरे सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को बंद करके उनकी जगह निजी स्कूलों को स्थापित करने का आरोप लगाते हुए केजरीवाल ने कहा कि सिसोदिया के आने तक दिल्ली में गरीब परिवारों के बच्चों ने अपने शैक्षणिक सपनों को छोड़ दिया था। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि आज, दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बच्चे IIT में प्रवेश ले रहे हैं और अखिल भारतीय चिकित्सा परीक्षा पास कर रहे हैं। यह एक क्रांति है।
इसके साथ ही केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली ने पिछले 8 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति देखी है; इस क्रांति के पीछे केवल एक व्यक्ति है– मनीष सिसोदिया। उन्होंने कहा कि इस स्कूल में फ्रेंच-जर्मन-स्पेनिश-जापानी पढ़ाई जाती है। मैं चैलेंज करता हूँ किसी निजी स्कूल में इतनी विदेशी भाषाएं पढ़ाई जाती हो तो मेरा नाम बदल देना। ये स्कूल कोलम्बिया विश्वविद्यालय की तरह दिखाई देगा। ऐसा लगेगा बच्चा कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़कर आया है। उन्होंने कहा कि पहले सरकारी स्कूलों में पढ़कर ही IAS-IPS, वैज्ञानिक, डॉक्टर बनते थे। 1990 के बाद सरकारी स्कूलों को षड्यंत्र के तहत बर्बाद किया और प्राइवेट स्कूल तेज़ी से बढ़े। लेकिन 8 साल में दिल्ली के सरकारी स्कूल शानदार हो गए है।

इसके साथ केजरीवाल ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। केजरीवाल ने कहा कि 75 साल में सरकारी स्कूलों का बेड़ा गर्क कर दिया गया। देश की किस्मत थी जो मनीष सिसोदिया मिले जिन्होंने सरकारी स्कूल शानदार बनाए। इन्होंने उनको जेल में डाल दिया, श्री राम को भी वनवास हुआ था। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब कोई अच्छा काम करता है तो सारी असुरी शक्तियां इकट्ठी हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों की भगवान परीक्षा लेते हैं। सत्यवादी राजा हरीशचंद्र का राज पाठ चला गया।

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