शारदीय नवरात्र में मां दक्षिणा काली धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
आस्था का केंद्र बना जौनपुर का ‘कलकत्ता वाली काली मंदिर’

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: जौनपुर शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर मां आद्याशक्ति दक्षिणा काली मंदिर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ रहा है। शहर के दक्षिणी छोर पर सिटी स्टेशन के समीप ओवरब्रिज के नीचे स्थित इस मंदिर में हर दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं। नवरात्र का पहला दिन शुरू होते ही यहां दर्शन-पूजन का अनवरत क्रम जारी है।
मां दक्षिणा काली की विशाल एवं भव्य प्रतिमा अपनी अद्वितीय छटा बिखेर रही है। श्रद्धालु नारियल, चुनरी और अड़हुल की माला अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं। मंदिर की महिमा ऐसी है कि यहां आने वाले भक्तों को तुरंत ही आंतरिक शांति और आस्था का अद्भुत अनुभव होता है।
1984 में हुई थी स्थापना, ‘कलकत्ता वाली काली’ के नाम से प्रसिद्ध
मां काली धाम की स्थापना वर्ष 1984 में हुई थी। इस मंदिर को लोग प्रेमपूर्वक ‘कलकत्ता वाली काली’ के नाम से भी जानते हैं। मंदिर के संस्थापक एवं पुजारी भागवती सिंह ‘वागीश’ ने बताया कि यह स्थलीय काली जी की सनातनी सिद्धपीठ है, जहां मां अपने भक्तों के भाग्य का नवसृजन कर देती हैं। उनका कहना है कि “जो व्यक्ति सच्चे दिल से मां का स्मरण करता है, उसके भाग्य का कपाट स्वयं खुल जाता है।”
29 सितंबर को विशेष महत्व
इस बार शारदीय नवरात्र के अंतर्गत 29 सितंबर, सोमवार को कालरात्रि का दिन विशेष महत्व रखता है। यह सप्तमी तिथि मां काली की आराधना के लिए सर्वशक्ति और सौभाग्य प्रदायक मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां काली के दर्शन, पूजन और स्मरण से जीवन ज्योर्तिमय और मंगलमय बन जाता है।
व्यवस्था में जुटे लोग
मां के इस महापर्व पर श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर व्यवस्था में सर्वेश सिंह सोनू, दलसिंगार विश्वकर्मा, रामपाल विश्वकर्मा, वेद प्रकाश सिंह एडवोकेट, विक्रम गुप्ता, अमित निगम, संतोष चतुर्वेदी, विपिन सिंह, भानु मौर्या, पीयूष श्रीवास्तव और वंदेश सिंह सहित अनेक लोग तन-मन से जुटे हुए हैं।






