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संस्कृति व प्रकृति का संरक्षण करना हमारा दायित्व है: डा. कविता जैन

सोनीपत । पूर्व मंत्री डा. कविता जैन ने कहा है कि हमें परंपरा, संस्कृति के साथ ही प्रकृति का भी संरक्षण करना है। इसके लिए गाय के गोबर, मिट्टी और आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से बनी भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना होनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश उपाध्यक्ष डा. कविता जैन ने श्री गणपति शरणम धर्मार्थ सोसायटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही।

उन्होंने पुराना गंज बाजार में भगवान श्री गणेश जी की मूर्ति की स्थापना के बाद पूजा अर्चना की और आरती में भाग लिया। बुधवार को कहा कि एक सप्ताह तक चलने वाले भगवान गणपति महोत्सव में हिंदुओं के आराध्य देव प्रथम पूजनीय, विघ्नहर्ता, शुभता के प्रतीक एवं प्रकृति के रक्षक भगवान श्री गणेश का उत्सव है। प्लास्टिक थर्माकोल तथा अन्य सिंथेटिक पदार्थ से बनी भगवान श्री गणेश की मूर्तियों का प्रचलन बाजार में बढ़ रहा है, इनका विसर्जन प्रकृति के संरक्षण के तो खिलाफ है ही साथ में जल में न घुलने के कारण भगवान की इन पर पूज्य मूर्तियों की बाद में अनदेखी भी देखने को मिलती है।

जिससे हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। महर्षि वेदव्यास ने महाभारत जैसे विशाल ग्रंथ की रचना की थी और इसे लिखने के लिए प्रभु की प्रेरणा से भगवान श्रीगणेश को चुना गया था, वजह थी कि भगवान श्री गणेश कुशाग्र बुद्धि के मालिक थे। हरिदास पाटिल, शामराव देवकर, अमोल शिंदे, डॉक्टर अतुल पाटिल, नारायण भंगे, कैलाश जाधव, रवि पाटिल, रमेश सुतार, अभिजीत शिंदे, रवि गोर, सुहास माने, कैलाश जलवे, तानाजी गोरे आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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