
जन एक्सप्रेस /नई टिहरी :- गायत्री शक्तिपीठ शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में बुधवार को जीआईसी मोलधार में छात्र-छात्राओं के साथ संस्कार और नशामुक्ति विषय पर विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को देव संस्कृति से जोड़ते हुए संस्कार, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राज्य आंदोलनकारी एवं नशामुक्ति अभियान के मुख्य प्रबंधक देवी सिंह पवार ने बच्चों के बीच बैठकर खुला संवाद किया। उन्होंने गुरुदेव आचार्य श्रीराम शर्मा के संदेश “हम सुधरेंगे, जग सुधरेगा। हम बदलेंगे, जग बदलेगा” को विद्यार्थियों तक पहुंचाया।
देवी सिंह पवार ने छात्र-छात्राओं को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाते हुए कहा कि “शराब नहीं, संस्कार दो। नशा छोड़ो, परमात्मा से जुड़ो।” उन्होंने कहा कि चरित्र निर्माण ही सच्ची शिक्षा है और संस्कारवान युवा ही देश को सही दिशा दे सकते हैं।
गायत्री मंत्र जप से बढ़ेगा आत्मबल: बीपी बधानी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गायत्री शक्तिपीठ टिहरी के व्यवस्थापक बी.पी. बधानी ने शांतिकुंज हरिद्वार की देव संस्कृति और गायत्री साधना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्र-छात्राओं से प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नियमित साधना से जीवन में सकारात्मक सोच और आत्मबल को बढ़ावा मिलता है।
इस अवसर पर प्रसिद्ध पर्यावरणविद एवं सर्वोदय नेता साहब सिंह सजवाण ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव आचार्य श्रीराम शर्मा ने जिस आदर्श समाज का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी आज की युवा पीढ़ी की है।
शिक्षकों ने भी लिया संस्कार कार्यक्रमों में भागीदारी का संकल्प
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य विजय कैतुरा सहित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी गायत्री परिवार के संस्कार कार्यक्रमों में भागीदारी का संकल्प लिया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के समापन पर देवी सिंह पवार के नेतृत्व में सभी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने नशामुक्त भारत बनाने की सामूहिक शपथ ली। विद्यार्थियों को गायत्री शक्तिपीठ आने और विभिन्न संस्कार शिविरों में भाग लेने के लिए भी आमंत्रित किया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि व्यक्तिगत सुधार और संस्कारों के जरिए ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।






