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योगा डे पर गायत्री साधकों ने भारत सहित 80 देशों में किया योगाभ्यास

जन एक्सप्रेस /हरिद्वार  अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार का योग अभियान वैश्विक स्तर पर देखने को मिला। भारत सहित 80 देशों में देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के योग प्रशिक्षकों और गायत्री परिवार के स्वयंसेवकों ने सामूहिक योगाभ्यास, प्रज्ञा योग साधना एवं जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए। वहीं हरिद्वार स्थित शांतिकुंज में देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों साधकों ने अंतरराष्ट्रीय योग प्रोटोकॉल के अनुरूप योगाभ्यास कर योग को जीवन-पद्धति के रूप में अपनाने का संकल्प लिया। इस दौरान देश-विदेश के विभिन्न प्रज्ञा केंद्रों से योग, साधना और सांस्कृतिक जागरण के प्रेरक संदेश भी प्रसारित किए गए।

शांतिकुंज में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम, आसन या रोग निवारण की पद्धति नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान का सर्वोच्च शिखर है। उन्होंने कहा कि यदि योग का उद्देश्य केवल बीमारी दूर करना होता, तो वह किसी सामान्य चिकित्सा पद्धति से अलग नहीं होता। योग व्यक्ति की चेतना को ऊर्ध्वगामी बनाकर उसे आत्मविकास और लोकमंगल के मार्ग पर अग्रसर करता है।

डॉ. पण्ड्या ने युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा प्रतिपादित प्रज्ञा योग को वर्तमान युग की चुनौतियों का समग्र समाधान बताते हुए कहा कि जीवन का प्रत्येक कर्म—बोलना, चलना, बैठना, खाना और सोना—यदि पूर्ण जागरूकता और कुशलता के साथ किया जाए, तो वह भी योग बन जाता है।

शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के योग प्रशिक्षकों और शांतिकुंज के योग साधकों ने दिल्ली, नोएडा, हैदराबाद, भोपाल, रायपुर, रांची, पटना सहित देशभर के प्रज्ञा संस्थानों में योग दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय योग प्रोटोकॉल के अनुसार योगाभ्यास कराया। वहीं कोलकाता के रेड रोड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में भी देवसंस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज से प्रशिक्षित योग साधकों ने सहभागिता निभाई।

शांतिकुंज के विदेश विभाग के अनुसार कनाडा, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, मॉरिशस, इंग्लैंड, लिथुआनिया और ऑस्ट्रिया सहित अनेक देशों में भी शांतिकुंज की टोलियों एवं प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए।

कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने योगमय, संयमित एवं जागरूक जीवनशैली अपनाने तथा “मनुष्य में देवत्व के उदय और धरती पर स्वर्ग के अवतरण” के युगदृष्टा संकल्प को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया।

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