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पलानीस्वामी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन पर साधा निशाना

तमिलनाडु के हितों की रक्षा न करने का आरोप लगाते मुख्यमंत्री एम के स्टालिन पर निशाना साधा। पलानीस्वामी ने कहा कि स्टालिन ने मेकेदातु में कावेरी नदी पर जलाशय के निर्माण के संबंध में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के बयान का पुरजोर विरोध नहीं किया। तमिलनाडु इस बांध के निर्माण का विरोध कर रहा है।

तमिलनाडु का कहना है कि इस परियोजना से उसे नुकसान पहुंचेगा और इसे लागू करने के लिए राज्य की सहमति आवश्यक है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पलानीस्वामी ने कहा कि 2018 में उनकी पिछली सरकार के प्रयासों के कारण, कावेरी प्रबंधन प्राधिकरण (सीएमए) की बैठकों में मेकेदातु मुद्दे पर कभी चर्चा नहीं की गई।

पलानीस्वामी के अनुसार, सीएमए ने कहा था कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करेगा क्योंकि जलाशय कावेरी नदी क्षेत्र में प्रस्तावित है और परियोजना के लिए तमिलनाडु की सहमति आवश्यक है। अन्नाद्रमुक प्रमुख ने एक बयान में कहा, ‘‘इसके बाद, मेकेदातु मुद्दा इस साल मई तक शांत रहा। लेकिन, कर्नाटक में (मई में) कांग्रेस सरकार आने के बाद, उपमुख्यमंत्री शिवकुमार यह कहकर मामले को तूल दे रहे हैं कि बांध निश्चित रूप से बनाया जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के तुरंत बाद शिवकुमार ने अपने अधिकारियों से इस मामले में तेजी लाने को कहा था। पलानीस्वामी ने कहा कि शिवकुमार ने हाल में इस मुद्दे पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को भी पत्र लिखा था। पलानीस्वामी ने कावेरी और कच्चातीवू मुद्दों का हवाला देते हुए दावा किया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) जब भी सत्ता में होती है तो ‘‘तमिलनाडु के हितों को नजरअंदाज करती है।’’

उन्होंने कावेरी मुद्दे पर ‘‘चुप’’ रहने को लेकर स्टालिन की आलोचना की और व्यक्तिगत रूप से उनसे कड़ी प्रतिक्रिया की मांग की। पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री से मेकेदातु बांध पर कर्नाटक को आगे बढ़ने से रोकने के लिए द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के 38 लोकसभा सदस्यों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने का आग्रह किया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु को ‘‘रेगिस्तान में बदलने’’ से रोकने के लिए अन्नाद्रमुक संघर्ष करेगी।

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