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देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या जिनेवा में वैश्विक AI सम्मेलन में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

जन एक्सप्रेस /हरिद्वार :-  देव संस्कृति विश्वविद्यालय (देसंविवि) के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या 6 से 8 जुलाई तक स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित प्रतिष्ठित वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना हो गए हैं। इस सम्मेलन में वे भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र भारतीय प्रतिनिधि होंगे।

यह सम्मेलन जिनेवा सेंटर फॉर सिक्योरिटी पॉलिसी (GCSP) के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें दुनिया भर के नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, कूटनीतिज्ञ, संसदीय प्रतिनिधि, सुरक्षा विशेषज्ञ और मानवीय संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे।

AI सुरक्षा और वैश्विक सहयोग पर होगा मंथन

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न संभावित वैश्विक जोखिमों पर साझा सुरक्षा मानक विकसित करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाना है।

प्रस्थान से पूर्व डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने बताया कि सम्मेलन में अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ, भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों के AI सुरक्षा मॉडल और साझा मानकों पर चर्चा होगी।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन के दौरान फ्रंटियर AI मॉडल के पूर्व मूल्यांकन, सुरक्षा परीक्षण, घटना रिपोर्टिंग, मॉडल सुरक्षा और जिम्मेदार AI विकास के लिए न्यूनतम वैश्विक सुरक्षा मानकों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

वैश्विक रिपोर्ट का होगा विमोचन

सम्मेलन में AI से जुड़े गंभीर वैश्विक जोखिमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ‘The Essential Convergence: Global Compact on Extreme AI Risks’ का भी विमोचन किया जाएगा। इस रिपोर्ट में भविष्य की AI चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ होंगे शामिल

शांतिकुंज के अनुसार सम्मेलन में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता जोडी विलियम्स, GCSP के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थॉमस ग्रेमिंगर तथा स्ट्रैटेजिक फोरसाइट ग्रुप के अध्यक्ष संदीप वासलेकर सहित कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। सम्मेलन में AI गवर्नेंस, मानव सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार उपयोग पर व्यापक चर्चा होगी।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय और उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण

डॉ. चिन्मय पण्ड्या शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक कूटनीति के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका इस वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना देव संस्कृति विश्वविद्यालय, उत्तराखंड और पूरे देश के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।

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