
जन एक्सप्रेस / उत्तरकाशी : डिजिटल इंडिया का दावा और धरातल पर हकीकत का फासला 65 किलोमीटर लंबा है। न्यूगांव-गाजणा क्षेत्र के 25 हजार लोग आज भी एक आधार कार्ड के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काट रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य प्रियंका रावत ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन की नींद तोड़ने की कोशिश की है। गाजणा क्षेत्र में 26 ग्राम पंचायतें हैं, पर एक भी स्थायी आधार सेवा केंद्र नहीं। नतीजा नया आधार बनवाना हो या पुराने में सुधार, लोगों को 40 से 65 किमी दूर उत्तरकाशी जाना पड़ता है। मजदूरी छोड़ो, किराया भरो, दिनभर लाइन में लगो। प्रियंका रावत का सवाल सीधा है जब हर योजना आधार से जुड़ी है, तो आधार ही जनता से 65 किमी दूर क्यों? उन्होंने धौंतरी को केंद्रीय स्थान बताते हुए वहां तत्काल आधार केंद्र खोलने की मांग की। ज्ञापन में दूसरा दर्द सड़कों का है। उडरी, कुमारकोट और भेटियारा-लोदाड़ा मोटर मार्ग जगह-जगह टूटे पड़े हैं। गड्ढे नहीं, गड्ढों में सड़क ढूंढनी पड़ती है। बरसात में हालात और खतरनाक हो जाते हैं। स्कूली बच्चे, बीमार, बुजुर्ग सब जान हथेली पर लेकर चलते हैं। प्रियंका रावत ने प्रशासन को आईना दिखाया इन मार्गों के सुधारीकरण के लिए धनराशि स्वीकृत हो चुकी है, फिर भी काम शुरू नहीं हुआ। यह सीधा सीधा लापरवाही नहीं, आपराधिक अनदेखी है। जब बजट पास है, तो फाइल किसकी टेबल पर अटकी है? प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अधिकारी जवाब दें। प्रियंका रावत ने दो टूक कहा स्वीकृत धनराशि का ब्योरा और काम न शुरू होने की लिखित वजह सार्वजनिक की जाए। जनता की मूलभूत सुविधा और सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं। प्रशासन प्राथमिकता तय करे, वरना जनता सड़क पर उतरेगी। यह ज्ञापन नहीं, जनता का अल्टीमेटम है। 25 हजार लोग पूछ रहे हैं कि ‘विकास’ उनके गांव कब पहुंचेगा? अगर स्वीकृत बजट के बाद भी सड़क नहीं बनती और आधार केंद्र नहीं खुलता, तो यह भ्रष्टाचार नहीं तो और क्या है?






